ईरान ने आरोप लगाया है कि एक अमेरिकी पनडुब्बी ने हिंद महासागर में उनके युद्धपोत को बिना चेतावनी दिए टॉरपीडो से डुबो दिया, जिससे 87 नाविकों की जान चली गई। ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने इसे अंतरराष्ट्रीय जल में “क्रूरता” करार देते हुए चेतावनी दी कि अमेरिका इसकी भारी कीमत चुकाएगा।

जहाज भारत के नौसैनिक अभ्यास से लौट रहा था
ईरानी फ्रिगेट आईआरआईएस डेना कुछ सप्ताह पहले भारत में आयोजित नौसैनिक अभ्यास में शामिल हुआ था और वापस लौटते समय हमला झेला। अरागची ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह हमला ईरानी सीमा से लगभग 2,000 मील दूर अंतरराष्ट्रीय जल में हुआ और जहाज पर करीब 130 नाविक सवार थे।

हमले की स्थिति और बचाव अभियान
हमला श्रीलंका के निकट अंतरराष्ट्रीय जल में हुआ। घटना के तुरंत बाद श्रीलंकाई नौसेना ने डिस्ट्रेस कॉल मिलने पर बचाव अभियान शुरू किया। इसमें 32 नाविकों को सुरक्षित निकाल लिया गया, जबकि 87 शव बरामद हुए। कुछ रिपोर्टों में 61 नाविक अभी भी लापता बताए गए हैं। कुल मिलाकर जहाज पर लगभग 180 लोग मौजूद थे।

अमेरिकी रक्षा मंत्री का बयान
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पेंटागन में प्रेस ब्रीफिंग के दौरान पुष्टि की कि अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत को टॉरपीडो से डुबो दिया। उन्होंने इसे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा दुश्मन जहाज को डुबाने का पहला मामला बताया। उन्होंने कहा कि हमले का वीडियो जारी किया गया है जिसमें दिखाया गया कि जहाज का पिछला हिस्सा उड़ गया और स्टर्न से डूबना शुरू हुआ। हेगसेथ ने जोर देकर कहा कि अमेरिका युद्ध जीतने के उद्देश्य से यह कार्रवाई कर रहा है।