दुनियाभर में क्रॉनिक बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। हृदय रोग, डायबिटीज, किडनी और लिवर संबंधी दिक्कतें अब केवल उम्रदराज लोगों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही हैं। इन्हीं में एक बड़ी समस्या है हाई ब्लड प्रेशर, जिसे ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य से अधिक रक्तचाप न केवल दिल को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि किडनी, लिवर, नसों और आंखों तक को प्रभावित कर सकता है। चिंताजनक बात यह है कि कई मरीजों को हाई बीपी की समस्या होती है, लेकिन उन्हें इसका पता भी नहीं लगता।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट बताती है कि दुनिया में करीब 140 करोड़ लोग उच्च रक्तचाप से प्रभावित हैं। स्ट्रोक और हार्ट अटैक जैसे गंभीर मामलों के पीछे यह प्रमुख कारण माना जाता है। समय पर जांच और इलाज न होने पर यह समस्या जानलेवा रूप ले सकती है। बढ़ते जोखिम को देखते हुए वैज्ञानिकों ने अब एक नई 10 मिनट की स्कैन तकनीक विकसित की है, जो ब्लड प्रेशर के उपचार में अहम बदलाव ला सकती है।
एड्रिनल ग्रंथि की गड़बड़ी है बड़ा कारण
चिकित्सकों का कहना है कि हाई ब्लड प्रेशर वाले लगभग 25% मरीजों में एल्डोस्टेरोन हार्मोन की मात्रा अधिक पाई जाती है। यह हार्मोन एड्रिनल ग्रंथि में बनता है और शरीर में नमक-संतुलन नियंत्रित करता है। कई मामलों में इस असंतुलन का पता पारंपरिक जांच से नहीं लगाया जा सकता।
इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने एक ऐसा स्कैन विकसित किया है, जो एड्रिनल ग्रंथि की समस्या को आसानी से पहचान सकता है। पहले मौजूद टेस्ट इस असामान्यता का सही संकेत नहीं दे पाते थे।
स्कैन से मिलेगा लक्षित उपचार
विशेषज्ञों के अनुसार, यह नया परीक्षण डॉक्टरों को हर मरीज के लिए सही उपचार तय करने में मदद करेगा। अगर ग्रंथि आवश्यकता से अधिक हार्मोन बना रही है, तो दवाओं से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। अब तक उपचार का मुख्य आधार जीवनशैली में बदलाव और आहार सुधार रहा है, जबकि हार्मोनल कारणों की पहचान अक्सर नहीं हो पाती थी।
अध्ययन के प्रमुख लेखक और लंदन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ब्रायन विलियम्स का कहना है कि इस तरह की जांच का इंतजार दशकों से था। यह तकनीक कई मरीजों में हाई बीपी के असली कारणों का पता लगाकर उपचार को अधिक प्रभावी बना सकती है।
इलाज की दिशा बदलेगा नया स्कैन
न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित शोध में बताया गया है कि प्रारंभिक परीक्षणों में यह स्कैन मरीजों में अधिक हार्मोन उत्पादन को सफलतापूर्वक पहचान पाया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक डायग्नोसिस की प्रक्रिया को पूरी तरह बदल सकती है और मरीजों को सटीक और लक्ष्यित इलाज मिल सकेगा। फिलहाल इसका फेज-2 क्लीनिकल ट्रायल जारी है।
हाई बीपी के बढ़ते मामले चिंता का कारण
कम उम्र में बढ़ता हाई ब्लड प्रेशर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बड़ी चुनौती बन रहा है। डॉक्टर चेतावनी देते हैं कि यदि इसे नियंत्रित नहीं किया गया, तो आने वाले समय में दिल, किडनी और लिवर से जुड़े मामलों का बोझ स्वास्थ्य प्रणाली पर और बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि हाई ब्लड प्रेशर को हल्के में लेना खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि इसका असर दिमाग और हृदय पर सबसे पहले पड़ता है।