मेरठ में बढ़ते प्रदूषण और सर्द हवाओं के कारण हृदय और मस्तिष्क पर असर बढ़ गया है। विशेषज्ञों के अनुसार जहरीली हवा सांस के रास्ते शरीर में प्रवेश कर हृदय रोग और ब्रेन स्ट्रोक का जोखिम कई गुना बढ़ा रही है। लोग थोड़ी मेहनत करने पर थकान, सांस फूलना और रक्तचाप बढ़ने जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।

जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और निजी अस्पतालों में हृदय और श्वसन रोगों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। चिकित्सक बच्चों, बुजुर्गों और पुराने रोगियों को ठंड से बचने और दिनभर गुनगुना पानी पीते रहने की सलाह दे रहे हैं, जिससे हार्ट अटैक का खतरा कम हो सकता है।

कोहरा और स्मॉग बढ़ा रहे जोखिम

चिकित्सकों का कहना है कि कोहरा और स्मॉग दिल और दिमाग पर दोहरा असर डाल रहे हैं। ठंड के कारण धमनियां सिकुड़ जाती हैं, जिससे रक्त प्रवाह प्रभावित होता है और दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। पसीना कम आने और प्यास न लगने के कारण लोग पर्याप्त पानी नहीं पीते, जिससे खून गाढ़ा हो जाता है। गाढ़ा रक्त हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ा देता है।

विशेषज्ञों ने बताया कि रात के समय हार्ट अटैक की घटनाएं अधिक देखी जाती हैं। इसलिए सर्दियों में बिना प्यास लगे भी गुनगुना पानी पीते रहना लाभकारी है।

शराब और सिगरेट से रहें दूरी

वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव अग्रवाल के अनुसार, मेरठ पहले से ही देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल है। हृदय रोगियों के लिए यह मौसम और खतरनाक हो सकता है। उन्होंने सलाह दी कि चिकना, तला-भुना और मसालेदार भोजन छोड़कर हल्का और सुपाच्य आहार लें। शुगर और बीपी के मरीज अपनी दवा नियमित लें और जांच कराते रहें।

धूम्रपान और शराब दिल के लिए सबसे खतरनाक साबित हो सकते हैं। शराब शरीर का तापमान गिराती है और सिगरेट धमनियों को संकुचित करती है। हृदय रोगियों को सुबह-शाम टहलने से परहेज करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर घर के अंदर हल्का व्यायाम करना बेहतर है।

खानपान और पोषण

वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. ममतेश गुप्ता ने कहा कि सही खानपान इस मौसम में दिल की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता है। मल्टीग्रेन आटा, अलग-अलग कोल्ड प्रेस्ड तेल, मौसमी फल-सब्जियां, मेवे और हल्का प्रोटीन दिल को मजबूत रखते हैं। वहीं, लाल मिर्च, मैदा, फास्ट फूड और मीठे पेय से बचना चाहिए। घर में एयर प्यूरीफायर या ऑक्सीजन देने वाले इनडोर पौधे रखना भी लाभकारी है।

शरीर को गर्म रखें

जिला अस्पताल के प्रभारी एसआईसी डॉ. योगेंद्र अग्रवाल ने कहा कि हृदय, फेफड़े और गठिया-बाय के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उन्होंने सलाह दी कि तीन-चार लेयर में कपड़े पहनें और गर्दन व सिर को भी ढककर रखें।