मार्च के आगमन के साथ मौसम धीरे-धीरे बदलने लगा है और रात में पंखा चलाकर सोना आम होता जा रहा है। इस समय सर्दी-जुकाम होना सामान्य है, लेकिन शुरुआती संकेतों को पहचानकर आप इससे बचाव कर सकते हैं।
जब गले में हल्की जलन या खिचखिच महसूस हो और नाक से पानी बहने लगे, तो समझ जाइए कि सर्दी-जुकाम आने वाला है। आमतौर पर ये लक्षण जुकाम शुरू होने से लगभग 24 घंटे पहले दिखाई देते हैं। इस दौरान कुछ सरल सावधानियां अपनाकर आप बीमारी को रोक सकते हैं।
घर में उपलब्ध प्राकृतिक उपाय अपनाएं
एलोपैथिक दवा लेने से पहले रसोई में मौजूद औषधीय मसालों और जड़ी-बूटियों का सहारा लेना बेहतर होता है। गुनगुना पानी पीना और भाप लेना श्वसन तंत्र में जमा कफ को पतला कर राहत देता है।
1. अदरक और शहद
गले में दर्द और खांसी के लिए अदरक और शहद का मिश्रण बेहद उपयोगी है। अदरक में मौजूद ‘जिंजरॉल’ में एंटी-बैक्टीरियल और सूजन कम करने वाले गुण होते हैं। एक चम्मच अदरक का रस और थोड़ा शहद दिन में दो से तीन बार लेने से गले की जलन और बहती नाक में राहत मिलती है।
2. नमक पानी से गरारे और भाप
गले में तेज दर्द होने पर हल्के गुनगुने पानी में आधा चम्मच सेंधा नमक मिलाकर गरारे करें। यह गले में मौजूद हानिकारक तत्वों को बाहर निकालता है। इसके साथ ही गर्म पानी की भाप लेना बंद नाक को खोलने और श्वसन मार्ग की सूजन कम करने में मदद करता है।
3. तुलसी-काली मिर्च का काढ़ा
तुलसी को ‘जड़ी-बूटियों की रानी’ कहा जाता है। 5-7 तुलसी के पत्ते, 2 काली मिर्च और एक छोटा टुकड़ा दालचीनी को पानी में उबालकर काढ़ा बनाएं। यह न सिर्फ बंद नाक खोलता है बल्कि शरीर का तापमान संतुलित रखकर सर्दी को कम करता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स फेफड़ों की सफाई में मदद करते हैं।
4. पर्याप्त पानी और हाइड्रेशन
बीमारी के दौरान शरीर को हाइड्रेटेड रखना बेहद जरूरी है। गुनगुना पानी, हर्बल टी या सूप नियमित पीते रहें। ठंडी चीजों और खट्टे खाद्य पदार्थों से परहेज करें, क्योंकि ये गले की खराश बढ़ा सकते हैं।
यदि इन उपायों के बाद भी तीन दिन से अधिक बुखार, जुकाम या सांस लेने में परेशानी बनी रहे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।