नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026-27 में दिल्ली के स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूती देने के लिए कई अहम प्रावधान किए गए हैं। हालांकि बजट में सीधे तौर पर केवल दिल्ली के लिए अलग कोई निधि नहीं रखी जाती, लेकिन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, आयुष्मान भारत योजना, स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन और अन्य केंद्रीय स्वास्थ्य योजनाओं के जरिए राजधानी को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

एम्स दिल्ली को 5,200 करोड़ का आवंटन
केंद्रीय बजट में एम्स दिल्ली के लिए 5,200 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। यह राशि अस्पताल की चिकित्सा सेवाओं के विस्तार, अत्याधुनिक उपकरणों की खरीद, शोध कार्यों को बढ़ावा देने और मरीजों की बढ़ती संख्या को संभालने में इस्तेमाल की जाएगी। पिछले वर्ष वित्तीय वर्ष 2024-25 में एम्स को 4,523 करोड़ और 2023-24 में 4,134.67 करोड़ मिले थे। लगातार बढ़ते बजट से एम्स में सुपर-स्पेशियलिटी सेवाओं, पीजी सीटों, आइसीयू और अनुसंधान सुविधाओं को और सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी।

दिल्ली के अन्य अस्पतालों को भी बड़ा फंड
सुप्रसिद्ध सरकारी अस्पतालों को भी इस बजट में पर्याप्त निधि दी गई है। सफदरजंग अस्पताल को 2,179.58 करोड़, राम मनोहर लोहिया अस्पताल को 1,458.26 करोड़, लेडी हार्डिंग एवं सुचेता कृपलानी अस्पताल को 800 करोड़ और कलावती सरन चिल्ड्रन अस्पताल को 183.16 करोड़ रुपये मिले हैं। राजधानी के पांच प्रमुख अस्पतालों को कुल मिलाकर लगभग 9,821 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो पिछले वर्ष के 8,937 करोड़ की तुलना में 884 करोड़ अधिक है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से दिल्ली को लाभ
केंद्रीय बजट में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के लिए 37,227 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। राजधानी में जनसंख्या अधिक होने के कारण रोग-भार भी तेजी से बढ़ रहा है। एनएचएम के फंड से टीकाकरण अभियान, मातृ-शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम, मोहमल्ला क्लीनिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की सेवाओं को और मजबूत किया जाएगा।

डायरेक्ट बेनिफिट और आम जनता को फायदा
डीबीटी आधारित स्वास्थ्य कार्यक्रमों के तहत दिल्ली के स्वास्थ्य ढांचे को अधिक प्रभावी बनाने की योजना है। इससे नि:शुल्क जांच, रोग निगरानी, गर्भवती महिलाओं का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, सुरक्षित प्रसव और नवजात देखभाल जैसी सुविधाओं में सुधार होगा।

मेडिकल शिक्षा और सीटों में विस्तार
केंद्र सरकार ने अगले वर्ष 10,000 नई मेडिकल सीटें बढ़ाने और अगले पांच वर्षों में कुल 75,000 सीटों का लक्ष्य रखा है। इसका सीधा फायदा एम्स और दिल्ली के मेडिकल कॉलेजों को मिलेगा। इससे डॉक्टरों की संख्या बढ़ेगी और सरकारी व निजी दोनों स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी।

दिल्ली के प्रमुख लाभार्थी संस्थान:

  • एम्स दिल्ली: सुपर-स्पेशियलिटी और पीजी सीटों में विस्तार

  • मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज: एमबीबीएस और पीजी दोनों स्तर पर सीटों में वृद्धि

  • वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज (सफदरजंग): क्लिनिकल पीजी सीटों में संभावित वृद्धि

  • लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज: महिला चिकित्सा शिक्षा और पीजी सीटों में विस्तार

  • आर्मी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज, दिल्ली कैंट: सीमित लेकिन संभावित बढ़ोतरी

दिल्ली बन सकती है मेडिकल टूरिज्म हब
केंद्रीय बजट के इन प्रावधानों से दिल्ली का स्वास्थ्य क्षेत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होगा। विदेशी मरीजों की संख्या बढ़ने से नई तकनीक, आधुनिक उपकरण और विशेषज्ञ सेवाओं में निवेश बढ़ेगा। कैंसर, हृदय रोग, न्यूरोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स और ऑर्गन ट्रांसप्लांट जैसी सुपर-स्पेशियलिटी सेवाओं का दायरा बढ़ेगा।

इसके अलावा होटल, ट्रैवल, फार्मेसी और डायग्नोस्टिक सेक्टर भी इस वित्तीय मदद से सीधे लाभान्वित होंगे और स्वास्थ्य रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

दिल्ली की पहचान अब एक विश्वसनीय, किफायती और आधुनिक हेल्थकेयर हब के रूप में और सशक्त होगी।