नई दिल्ली। पाकिस्तान के बलूचिस्तान से निर्वासित बलोच नेता मीर यार बलोच ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को एक खुला पत्र भेजा है। इस पत्र में उन्होंने भारत और बलूचिस्तान के पुराने रिश्तों का उल्लेख करते हुए दोनों पक्षों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने की अपील की है। मीर यार बलोच ने बलूचिस्तान की जनता की ओर से भारत के नागरिकों को नववर्ष की शुभकामनाएं भी दी हैं।

अपने पत्र में बलोच नेता ने भारत और बलूचिस्तान के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों क्षेत्रों के बीच धार्मिक और व्यापारिक रिश्ते सदियों पुराने हैं और इन्हें और मजबूत किया जाना चाहिए। उन्होंने हिंगलाज माता मंदिर जैसे धार्मिक स्थलों को साझा विरासत का प्रतीक बताते हुए भारत से समर्थन की उम्मीद जताई।

मीर यार बलोच ने अपने पत्र में पाकिस्तान की नीतियों पर तीखा हमला बोला और कहा कि बलूचिस्तान की जनता लंबे समय से दमन और अन्याय का सामना कर रही है। उन्होंने दावा किया कि इस मुद्दे पर बलूचिस्तान के लोग भारत के साथ खड़े हैं और पाकिस्तान के प्रभाव को समाप्त करने की आवश्यकता है।

बलोच नेता ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा की गई कार्रवाई का जिक्र करते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सराहना की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की दृढ़ और साहसी नीति की प्रशंसा करते हुए कहा कि बलूचिस्तान के लोग बीते कई दशकों से अत्याचार झेल रहे हैं और अब समय आ गया है कि इस स्थिति का स्थायी समाधान निकाला जाए।

पत्र में चीन और पाकिस्तान के बढ़ते सहयोग को लेकर भी चिंता जताई गई है। मीर यार बलोच ने चेतावनी दी कि यदि बलूचिस्तान की स्वतंत्र सेनाओं को समय रहते मजबूत नहीं किया गया, तो भविष्य में चीन वहां अपने सैनिक तैनात कर सकता है। उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान में चीनी सैन्य मौजूदगी न सिर्फ क्षेत्र की स्थिरता के लिए, बल्कि भारत और बलूचिस्तान दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है।