ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि अब तक संगठन के तहत 80 से अधिक बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं, जिनमें सदस्य देशों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली है। उन्होंने कहा कि इन बैठकों ने आपसी सहयोग बढ़ाने और विभिन्न क्षेत्रों में संवाद को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

जयशंकर ने कहा कि ब्रिक्स की वर्तमान गति को बनाए रखते हुए इसे और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है। भारत, अध्यक्ष देश के रूप में, एक अधिक समावेशी और सहयोगात्मक ढांचे को आगे बढ़ाने के लिए लगातार सदस्य और साझेदार देशों के साथ संवाद कर रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि नए सदस्य देशों के लिए जरूरी है कि वे संगठन के भीतर बने साझा समझ और सहमति के ढांचे को गहराई से समझें और उसे आगे बढ़ाने में सहयोग करें, ताकि ब्रिक्स की कार्यप्रणाली सुचारु बनी रहे।

वैश्विक परिस्थितियों पर चिंता

विदेश मंत्री ने कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात में ब्रिक्स की भूमिका और अधिक अहम हो गई है। उन्होंने कहा कि यह मंच वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।

जयशंकर के अनुसार, दुनिया इस समय भू-राजनीतिक बदलाव, आर्थिक अस्थिरता, व्यापारिक तनाव और तकनीकी चुनौतियों के दौर से गुजर रही है, जिसका असर वैश्विक व्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है।

विकासशील देशों की उम्मीदें

उन्होंने कहा कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों की यह अपेक्षा बढ़ रही है कि ब्रिक्स वैश्विक स्थिरता बनाए रखने में एक निर्णायक भूमिका निभाए।

विदेश मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में बहुपक्षीय सहयोग, संवाद और आपसी विश्वास को मजबूत करना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।