कांग्रेस ने चीनी कंपनियों से जुड़े प्रतिबंधों में ढील देने की संभावनाओं और अमेरिका के साथ चल रहे टैरिफ विवाद को लेकर केंद्र की मोदी सरकार की विदेश नीति पर कड़ा प्रहार किया है। पार्टी का कहना है कि हालिया घटनाक्रम सरकार की चीन नीति में बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है, जिससे कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

कांग्रेस ने मीडिया में आई खबरों का हवाला देते हुए दावा किया कि सरकार पांच साल पहले सरकारी परियोजनाओं में चीनी कंपनियों की बोली पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाने की तैयारी कर रही है। पार्टी का आरोप है कि यह कदम चीन की आक्रामक नीति के सामने झुकने जैसा है। कांग्रेस ने इसे सरकार की चीन नीति में अचानक आया “यू-टर्न” बताते हुए संसद के बजट सत्र में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

खरगे का सरकार पर तीखा हमला

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए उनकी पुरानी टिप्पणी “मैं देश नहीं झुकने दूंगा” को याद किया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि मौजूदा हालात उस बयान के बिल्कुल विपरीत दिखाई दे रहे हैं।

खरगे ने कहा कि एक ओर पांच वर्षों से लागू चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध हटाने की चर्चा हो रही है, वहीं दूसरी ओर गलवान घाटी में शहीद हुए भारतीय सैनिकों के बलिदान को नजरअंदाज किया जा रहा है। उनका आरोप है कि सरकार अब चीनी कंपनियों के लिए दरवाजे खोलकर यह संकेत दे रही है कि उसकी कथित सख्ती केवल दिखावे तक सीमित थी।

उन्होंने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणियों का जिक्र करते हुए कहा कि रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री इस पर चुप्पी साधे हुए हैं। खरगे ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार का रवैया आत्मसम्मान से ज्यादा आत्मसमर्पण जैसा नजर आता है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि विदेश नीति का मूल उद्देश्य राष्ट्रीय हित होना चाहिए, लेकिन मौजूदा सरकार ने भारत की गुटनिरपेक्षता और रणनीतिक स्वतंत्रता की परंपरा को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने सरकार की विदेश नीति को अस्थिर बताते हुए कहा कि इसका सीधा खामियाजा देश की जनता को भुगतना पड़ रहा है।

जयराम रमेश ने उठाए गंभीर सवाल

कांग्रेस के संचार महासचिव जयराम रमेश ने भी चीनी कंपनियों से जुड़े प्रतिबंध हटाने की खबर साझा करते हुए कहा कि सरकार की ओर से इन दावों पर अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया है।

उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तान को सैन्य समर्थन दिया था और उपसेना प्रमुख ने उसे भारत के विरोधियों में शामिल बताया था। इसके बावजूद कुछ ही महीनों में चीनी कंपनियों पर लगी पाबंदियों को हटाने की तैयारी समझ से परे है।

जयराम रमेश का आरोप है कि इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में चीनी निवेश को मंजूरी देने, चीनी नागरिकों को वीजा में राहत और नीति आयोग की सिफारिशों के तहत यह पूरा कदम चीन के साथ व्यापारिक रिश्तों को सामान्य करने की दिशा में बढ़ाया जा रहा है।

उन्होंने दावा किया कि यह फैसला चीन की आक्रामक गतिविधियों के सामने सरकार की कमजोरी को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जहां एक ओर भारतीय सैनिकों की पारंपरिक गश्त सीमित की जा रही है, वहीं दूसरी ओर चीन पूर्वी लद्दाख में सैन्य मौजूदगी बनाए हुए है, अरुणाचल प्रदेश में लगातार उकसावे की कार्रवाई कर रहा है और ब्रह्मपुत्र नदी पर बड़े बांध परियोजनाओं को आगे बढ़ा रहा है।

कांग्रेस ने मांग की है कि सरकार संसद के बजट सत्र में देश को यह स्पष्ट बताए कि चीन नीति में यह अचानक बदलाव क्यों और किस उद्देश्य से किया जा रहा है।