महिला आरक्षण को लेकर संसद में हुई चर्चा के दौरान कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने दावा किया कि महिला आरक्षण का विचार सबसे पहले कांग्रेस ने ही दिया था। उन्होंने कहा कि कराची अधिवेशन में इस संबंध में प्रस्ताव पारित किया गया था और उस समय राजीव गांधी ने इसे आगे बढ़ाया था, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने इसका विरोध किया था।
इस मुद्दे पर प्रियंका गांधी ने भी सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण पर चर्चा तो की, लेकिन उस दौर में किसने इसका विरोध किया था, इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक देश में जातिगत जनगणना नहीं कराई जाएगी, तब तक विभिन्न वर्गों को उनका उचित प्रतिनिधित्व मिलना मुश्किल है।
प्रियंका गांधी ने मांग की कि महिला आरक्षण को 2029 तक लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि इसे लागू करने के लिए लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर लगभग 850 करनी होगी और इसके लिए परिसीमन आयोग गठित करना पड़ेगा, जो नए परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरे विधेयक में राजनीतिक हितों की झलक दिखाई देती है।
उन्होंने 2023 में पारित विधेयक का जिक्र करते हुए कहा कि उसमें जनगणना और परिसीमन का स्पष्ट उल्लेख था, लेकिन मौजूदा प्रक्रिया में इन पहलुओं को शामिल नहीं किया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि पुराने आंकड़ों के आधार पर ही आगे बढ़ने की जल्दबाजी क्यों की जा रही है। उनके अनुसार, बिना जातिगत जनगणना के किसी भी वर्ग को न्यायसंगत हिस्सेदारी नहीं मिल सकती।
प्रियंका गांधी ने ओबीसी वर्ग की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे को हल्के में लेते हुए इसे बाद में देखने की बात कही है, जो उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यह कोई साधारण तकनीकी विषय नहीं बल्कि बड़े सामाजिक वर्गों के अधिकारों से जुड़ा मामला है। उनका आरोप था कि सरकार जातिगत जनगणना के परिणामों को लेकर असहज है, क्योंकि इससे ओबीसी आबादी और उसके अधिकार स्पष्ट हो जाएंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी एक वर्ग के अधिकार छीनकर देश को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। उनके अनुसार, मौजूदा प्रस्ताव में संसद की संरचना बदलने की बात तो है, लेकिन इसमें बदलाव की प्रक्रिया और शर्तों को स्पष्ट नहीं किया गया है। उन्होंने 1971 की जनगणना के आधार पर परिसीमन पर लगी रोक का भी उल्लेख किया और कहा कि अब उस ढांचे में बदलाव करने की कोशिश की जा रही है।
प्रियंका गांधी ने सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि कुछ राज्यों की संसदीय ताकत कम करके राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि विधेयक को जिस तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है, वह लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने सुझाव दिया कि अगर सरकार वास्तव में महिला आरक्षण लागू करना चाहती है तो मौजूदा 543 सीटों के भीतर ही 33 प्रतिशत आरक्षण लागू कर सकती है, जिससे प्रक्रिया सरल हो जाएगी और सभी दलों की सहमति भी मिल सकती है। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि महिलाओं के सम्मान के नाम पर किसी भी तरह का राजनीतिक उपयोग न किया जाए।
वहीं, विपक्ष की इन टिप्पणियों के जवाब में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि इस विषय को लेकर जो भ्रम फैलाया जा रहा है, उसे दूर करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह दावा गलत है कि नए परिसीमन से दक्षिण भारत के राज्यों की संसदीय शक्ति कम हो जाएगी।
अमित शाह ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि परिसीमन के बाद विभिन्न राज्यों का प्रतिनिधित्व घटने के बजाय संतुलित तरीके से बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों की सीटों और उनकी हिस्सेदारी में वृद्धि होगी। तमिलनाडु और केरल के उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां भी प्रतिनिधित्व में बड़ा नुकसान नहीं होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि अभी दक्षिण भारत के राज्यों से 543 में से 129 सांसद आते हैं, जो लगभग 23.76 प्रतिशत है। प्रस्तावित बदलाव के बाद यह संख्या बढ़कर लगभग 150 सांसदों तक पहुंच सकती है, और उनकी हिस्सेदारी भी लगभग स्थिर या हल्की बढ़त के साथ बनी रहेगी।