लेंसकार्ट के ‘स्टाइल गाइड’ को लेकर सोशल मीडिया पर उठे विवाद के बाद कंपनी के संस्थापक और सीईओ पीयूष बंसल ने स्थिति स्पष्ट की है। पिछले कुछ दिनों से कंपनी की कथित ड्रेस और पॉलिसी गाइडलाइन को लेकर बहस तेज थी, जिसमें आरोप लगाए गए कि कर्मचारियों को बिंदी, तिलक और कलावा जैसे धार्मिक प्रतीक पहनने से रोका जाता है, जबकि हिजाब और पगड़ी की अनुमति दी जाती है।

विवाद की शुरुआत तब हुई जब फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने सोशल मीडिया पर लेंसकार्ट के स्टाइल गाइड का एक पेज साझा किया। इस कथित दस्तावेज में दावा किया गया कि कर्मचारियों को धार्मिक टीका, बिंदी या सिंदूर लगाने की अनुमति नहीं है, जबकि हिजाब और पगड़ी पहनने की छूट कुछ शर्तों के साथ दी गई है। इसके बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं और कुछ यूजर्स ने कंपनी के बहिष्कार तक की अपील कर दी।

इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए पीयूष बंसल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि वायरल हो रहा दस्तावेज पुराना ट्रेनिंग मटीरियल है और यह कंपनी की मौजूदा एचआर पॉलिसी को नहीं दर्शाता। उन्होंने स्वीकार किया कि पुराने दस्तावेज में कुछ बातें अनुचित तरीके से शामिल थीं, जिन्हें सही नहीं माना जा सकता।

बंसल ने यह भी स्पष्ट किया कि कंपनी ने इस गलती को 17 फरवरी को ही सुधार लिया था और विवाद शुरू होने से पहले ही संबंधित सामग्री को हटा दिया गया था। उन्होंने पूरी जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि संस्थापक और सीईओ होने के नाते इस तरह की चूक की जिम्मेदारी उनकी है और भविष्य में ऐसी सामग्री को लेकर और सख्त समीक्षा प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

उन्होंने यह भी दोहराया कि लेंसकार्ट किसी भी प्रकार की धार्मिक अभिव्यक्ति पर प्रतिबंध नहीं लगाता है और कर्मचारी अपनी आस्था से जुड़े प्रतीकों को सम्मान के साथ पहन सकते हैं। साथ ही कंपनी यह भी जांच कर रही है कि यह सामग्री प्रशिक्षण दस्तावेज में शामिल कैसे हुई।

अंत में बंसल ने कहा कि लेंसकार्ट एक भारतीय कंपनी है, जो अपने कर्मचारियों की विविधता और सांस्कृतिक पहचान का सम्मान करती है। उन्होंने इस मुद्दे को उठाने वालों का धन्यवाद भी किया और स्वीकार किया कि इससे कंपनी को अपनी प्रक्रियाओं को सुधारने का अवसर मिला है। कंपनी ने इस पूरे विवाद को लेकर खेद भी जताया है।