नई दिल्ली। भारत में डिजिटल पहचान और डिजिटल भुगतान की मजबूत व्यवस्था बन चुकी है, लेकिन कांग्रेस ने मतदाता सूची को पूरी तरह डिजिटल रूप में उपलब्ध न कराने पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा कि जब देश में 1.4 अरब लोगों का आधार डेटा डिजिटल है, तो वोटर लिस्ट को इलेक्ट्रॉनिक रूप में क्यों उपलब्ध नहीं कराया जा रहा। उन्होंने चुनाव आयोग से पूर्ण पारदर्शिता की मांग की है।
चुनाव आयोग पर उठाए गए मुख्य सवाल
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मतदाता सूची सभी नागरिकों के लिए पूरी तरह डिजिटल क्यों नहीं है?
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इलेक्ट्रॉनिक एक्सेस देने में देरी या बाधा क्यों बनी हुई है?
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डुप्लीकेशन रोकने के लिए मजबूत डिजिटल उपाय क्यों लागू नहीं किए गए?
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डिजिटल सिस्टम की जरूरत होने के बावजूद पारदर्शिता सुनिश्चित क्यों नहीं की गई?
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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की इलेक्ट्रॉनिक मतदाता सूची की मांग पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
डिजिटल इंडिया की उपलब्धियां
भारत में आधार प्रणाली लगभग 1.4 अरब नागरिकों को कवर करती है और इसे दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल पहचान प्रणाली माना जाता है। हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत की डिजिटल सार्वजनिक संरचना की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत ने 1.4 अरब लोगों के लिए डिजिटल पहचान बनाई है और हर महीने 20 अरब डिजिटल लेन-देन करने की क्षमता विकसित की है।
मतदाता सूची में देरी पर कांग्रेस का तर्क
कांग्रेस का कहना है कि जब डिजिटल भुगतान, स्वास्थ्य आईडी और अन्य डिजिटल सेवाएं सफलतापूर्वक चल रही हैं, तो मतदाता सूची को भी पूरी तरह डिजिटल और सार्वभौमिक रूप से उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और मतदाता डेटा में दोहराव या गड़बड़ी की संभावना कम होगी।
चुनाव आयोग की ओर से इस पर अभी औपचारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। यह मुद्दा ऐसे समय उठाया गया है जब देश में डिजिटल शासन और सरकारी उपलब्धियों पर चर्चा हो रही है। अब यह देखना बाकी है कि मतदाता सूची के डिजिटलीकरण और इलेक्ट्रॉनिक एक्सेस को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।