चेन्नई। तमिलनाडु में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच डीएमके और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर सहमति नहीं बन पाई है। दोनों दलों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन तय समय सीमा खत्म होने के बावजूद अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। इस स्थिति ने गठबंधन की दिशा को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है।
समय सीमा बीती, पर फैसला अधूरा
सूत्रों के मुताबिक डीएमके नेतृत्व ने कांग्रेस से स्पष्ट रुख तय करने को कहा था ताकि चुनावी रणनीति और प्रचार अभियान को अंतिम रूप दिया जा सके। पार्टी चाहती है कि सीटों का बंटवारा जल्द तय हो, लेकिन वार्ता अभी निर्णायक मोड़ तक नहीं पहुंची है।
2021 का फार्मूला बनाम नई मांग
पिछले विधानसभा चुनाव में डीएमके नीत गठबंधन के तहत कांग्रेस को 25 सीटें मिली थीं। माना जा रहा है कि डीएमके इस बार भी उसी संख्या पर सहमति जताने के पक्ष में है। साथ ही, व्यापक समझौते के हिस्से के रूप में कांग्रेस को एक राज्यसभा सीट देने का प्रस्ताव भी चर्चा में है।
हालांकि कांग्रेस का रुख इस बार अलग है। पार्टी कम से कम 35 सीटों की मांग कर रही है। उसका तर्क है कि राज्य में संगठन की मजबूती और पिछले चुनावी प्रदर्शन को देखते हुए उसे अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
नई सहयोगी पार्टियों से बढ़ी चुनौती
गठबंधन में शामिल अन्य दलों की दावेदारी ने समीकरण और जटिल बना दिए हैं। डीएमके के सामने चुनौती यह है कि वह सहयोगियों की अपेक्षाओं और चुनावी रणनीति के बीच संतुलन कैसे बनाए। सीटों की संख्या सीमित होने के कारण हर सहयोगी की मांग पूरी करना आसान नहीं दिख रहा।
क्या बदलेगा राजनीतिक गणित?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि सीटों पर समझौता नहीं होता, तो गठबंधन के स्वरूप पर असर पड़ सकता है। हालांकि अभी तक किसी भी दल ने औपचारिक रूप से अलग राह अपनाने का संकेत नहीं दिया है।
अब सबकी नजर दोनों पार्टियों के शीर्ष नेतृत्व पर है कि क्या वे बीच का रास्ता निकाल पाते हैं या यह गतिरोध आगामी चुनाव से पहले तमिलनाडु की राजनीति में नया मोड़ लेगा।