नई दिल्ली: भारत निर्वाचन आयोग ने मतदान में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एक अहम फैसला लिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि आगामी आम चुनावों और इस महीने होने वाले उपचुनावों के दौरान मतदान वाले दिन सभी कर्मचारियों को सवैतनिक अवकाश दिया जाएगा। यह सुविधा निजी, व्यावसायिक और औद्योगिक प्रतिष्ठानों में काम करने वाले कर्मचारियों के साथ-साथ दिहाड़ी और अस्थायी कर्मचारियों पर भी लागू होगी।
निर्वाचन आयोग द्वारा जारी प्रेस नोट में कहा गया है कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 135-बी के तहत जिन कर्मचारियों को लोकसभा या विधानसभा चुनाव में मतदान का अधिकार प्राप्त है, उन्हें वोट डालने के लिए अवकाश दिया जाना अनिवार्य है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि मतदान के दिन दी जाने वाली इस छुट्टी के कारण कर्मचारियों के वेतन में किसी प्रकार की कटौती नहीं की जा सकती।
आयोग के निर्देशों के अनुसार यह व्यवस्था असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनावों पर लागू होगी। इसके अलावा गोवा, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, नागालैंड और त्रिपुरा की आठ विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनावों में भी यही नियम प्रभावी रहेगा। आयोग ने चेतावनी दी है कि यदि कोई नियोक्ता इन नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ जुर्माना लगाया जा सकता है।
इन राज्यों में कब होगा मतदान
निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार असम, केरल, पुडुचेरी, गोवा, कर्नाटक, नागालैंड और त्रिपुरा में 9 अप्रैल को मतदान कराया जाएगा। वहीं तमिलनाडु, गुजरात और महाराष्ट्र में 23 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। पश्चिम बंगाल में दो चरणों में मतदान होगा, जिसकी तारीखें 23 अप्रैल और 29 अप्रैल तय की गई हैं। इन सभी चुनावों के परिणाम 4 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे।
निर्वाचन क्षेत्र से बाहर काम करने वालों को भी मिलेगी छुट्टी
चुनाव आयोग ने उन कर्मचारियों की स्थिति भी स्पष्ट की है जो अपने मतदान क्षेत्र से अलग किसी अन्य स्थान पर काम करते हैं। आयोग के अनुसार यदि कोई व्यक्ति किसी औद्योगिक या व्यावसायिक संस्थान में अपने निर्वाचन क्षेत्र से बाहर कार्यरत है, तब भी उसे मतदान करने के लिए सवैतनिक अवकाश दिया जाएगा। इसके लिए आवश्यक शर्त यह है कि वह संबंधित निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता के रूप में पंजीकृत हो।
निर्वाचन आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है। संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को भी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं ताकि हर मतदाता बिना किसी बाधा के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके।