नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में गृह मंत्रालय के लिए कुल 2.55 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो पिछले वर्ष के बजट अनुमान की तुलना में लगभग 9.44 प्रतिशत अधिक है। इसमें मुख्य रूप से पुलिस बलों, अर्धसैनिक बलों, खुफिया एजेंसियों और सीमा सुरक्षा से जुड़े कार्यक्रम शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, आगामी जनगणना के संचालन के लिए 6,000 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान रखा गया है, जिसका पहला चरण 1 अप्रैल से शुरू होगा।
सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों को बढ़ाया बजट
गृह मंत्रालय के कुल आवंटन का 68 प्रतिशत यानी लगभग 1.73 लाख करोड़ रुपये सीधे पुलिस और सुरक्षा बलों के लिए रखा गया है। इसमें इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CRPF), सीमा सुरक्षा बल (BSF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) और विशेष सुरक्षा समूह (SSG) शामिल हैं।
इंटेलिजेंस ब्यूरो को 2026-27 में 6,782.43 करोड़ रुपये मिले हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 63 प्रतिशत अधिक है। खासकर पूंजीगत व्यय में 257.01 करोड़ रुपये से बढ़कर 2,549.54 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है, ताकि एजेंसी की ऑपरेशनल क्षमता और तकनीकी संसाधनों को सशक्त बनाया जा सके।
अर्धसैनिक बलों में ITBP को 11,324.08 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, CRPF को 38,517.9 करोड़ रुपये, BSF को 29,567.64 करोड़ रुपये, CISF को 15,973.85 करोड़ रुपये और SSB को 10,984.51 करोड़ रुपये। असम राइफल्स को 8,796.68 करोड़ रुपये मिले हैं।
विशेष सुरक्षा समूह (SSG) को 499.99 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जबकि CBI को 1,104.98 करोड़ रुपये का बजट दिया गया है।
दिल्ली पुलिस और राजधानी में सुधार
दिल्ली पुलिस को 12,503.65 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं, जिसमें एनसीआर और मॉडल ट्रैफिक सिस्टम, संचार बुनियादी ढांचे का उन्नयन, प्रशिक्षण और तकनीकी सुधार शामिल हैं। राष्ट्रीय राजधानी के लिए अलग से 1,348 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है, जिसमें 1984 के दंगों के पीड़ितों के लिए मुआवजा, आपदा कोष के तहत अनुदान और जल आपूर्ति बुनियादी ढांचे में सुधार शामिल है।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों और वामपंथी उग्रवाद पर ध्यान
नक्सलवाद और वामपंथी उग्रवाद (LWE) से निपटने के लिए 3,610.80 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। गृह मंत्रालय का लक्ष्य 31 मार्च तक पूरे देश से वामपंथी उग्रवाद को समाप्त करना है।
गृह मंत्री अमित शाह की टिप्पणी
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बजट को "विकसित भारत की दिशा में एक ठोस रोडमैप" करार दिया। उन्होंने कहा कि यह बजट ग्रामीण अर्थव्यवस्था, किसानों, बुनकरों और हथकरघा उद्योग को सशक्त बनाने के लिए निर्णायक कदम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह वित्तीय योजना महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
शाह ने आगे कहा, "बजट 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखकर बनाया गया है। यह न केवल हर वर्ग और नागरिक को सशक्त करेगा, बल्कि ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा देगा।"