नई दिल्ली:  केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026–27 का आम बजट पेश करना शुरू कर दिया है और इस बार भारतीय रेलवे को इस बजट से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। 2017 के बाद से रेल बजट को आम बजट में शामिल कर दिया गया है, इसलिए इस बार भी रेलवे से जुड़े सभी प्रस्ताव इसी बजट का हिस्सा हैं। यात्रियों और रेलवे अधिकारियों को इस बजट से आधुनिक ट्रेनों, बेहतर सुरक्षा और वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर कई अहम घोषणाओं की आस है।

सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर प्रस्तावित

सूत्रों के मुताबिक सरकार देश के प्रमुख आर्थिक और औद्योगिक केंद्रों को जोड़ने के लिए सात हाई-स्पीड रेल रूट विकसित करने पर काम कर रही है। इन संभावित कॉरिडोरों में मुंबई–पुणे, पुणे–हैदराबाद, हैदराबाद–बेंगलुरु, हैदराबाद–चेन्नई, चेन्नई–बेंगलुरु, दिल्ली–वाराणसी और वाराणसी–सिलीगुड़ी शामिल हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य यात्रा समय घटाने के साथ-साथ क्षेत्रीय विकास को गति देना है।

रेलवे बजट से जुड़ी प्रमुख अपेक्षाएं

वरिष्ठ नागरिकों को फिर से रियायत
यात्रियों की लंबे समय से मांग रही है कि बुजुर्गों को रेल टिकट पर मिलने वाली छूट दोबारा शुरू की जाए। कोविड काल में यह सुविधा बंद कर दी गई थी। पहले 60 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों को 40 प्रतिशत और 58 वर्ष से अधिक की महिलाओं को 50 प्रतिशत तक की रियायत मिलती थी। बजट में इस व्यवस्था की वापसी की उम्मीद जताई जा रही है।

सुरक्षा पर ज्यादा खर्च
रेलवे में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए बजट में भारी निवेश संभव है। जानकारों के अनुसार, सेफ्टी से जुड़ी योजनाओं के लिए एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया जा सकता है। साथ ही रेलवे का पूंजीगत व्यय भी बढ़कर लगभग 2.75 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है।

कवच 4.0 के विस्तार की तैयारी
भारतीय रेलवे का स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम ‘कवच 4.0’ हाल ही में कुछ सेक्शनों पर लागू किया गया है। अब इसे बड़े पैमाने पर पूरे नेटवर्क में लागू करने की योजना है। इस बजट में 18,000 किलोमीटर तक कवच सिस्टम फैलाने के लिए अतिरिक्त फंड मिल सकता है।

वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों को बढ़ावा
लंबी दूरी के यात्रियों के लिए 24 कोच वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के बड़े पैमाने पर निर्माण की योजना को भी बजट से समर्थन मिलने की उम्मीद है। इन ट्रेनों में आधुनिक सुरक्षा सुविधाएं और पैंट्री कार जैसी व्यवस्थाएं शामिल होंगी, जिससे ये भविष्य में राजधानी जैसी ट्रेनों का विकल्प बन सकती हैं।

नॉन-एसी कोच की संख्या बढ़ाने पर जोर
सरकार पहले ही यह स्पष्ट कर चुकी है कि सामान्य और स्लीपर श्रेणी के कोचों का अनुपात बढ़ाया जाएगा। आने वाले वर्षों में 17,000 से ज्यादा नए नॉन-एसी कोच जोड़े जाने की योजना है, जिसे इस बजट में औपचारिक मंजूरी मिलने की संभावना है।

रेल बजट अब आम बजट का हिस्सा

भारत में 1924 से लेकर 2016 तक रेल बजट अलग से पेश किया जाता था। हालांकि, 2017 से इसे आम बजट में शामिल कर दिया गया, ताकि वित्तीय योजना और संसाधनों का बेहतर तालमेल बनाया जा सके। तभी से रेलवे से जुड़े सभी ऐलान केंद्रीय बजट के माध्यम से ही किए जा रहे हैं।