नई दिल्ली। बेरोजगारी भत्ते और आर्थिक अनुदानों पर निर्भरता कम करने की बजाय सरकार ने इस बार युवाओं को एक स्पष्ट संदेश दिया है—“सीखो, काम करो और आगे बढ़ो।” केंद्रीय बजट में किए गए विभिन्न घोषणाओं ने युवाओं के कौशल विकास और रोजगार के लिए मार्गदर्शन प्रस्तुत किया है, जिससे नए क्षेत्रों में संभावनाओं के द्वार खुलते दिखाई दे रहे हैं।

एवीजीसी सेक्टर को मिलेगी नई दिशा
सरकार ने एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (एवीजीसी) क्षेत्र को ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ का आधार मानते हुए देश के 15,000 माध्यमिक विद्यालयों और 500 महाविद्यालयों में एवीजीसी कंटेंट क्रिएटर लैब स्थापित करने की घोषणा की है। इस पहल का उद्देश्य युवाओं को शुरुआती स्तर से ही इस बढ़ते उद्योग के लिए तैयार करना है।

वैश्विक अवसरों का लाभ उठाने की रणनीति
स्वास्थ्य क्षेत्र में हेल्थकेयर पेशेवरों की बढ़ती वैश्विक मांग को देखते हुए बजट में पहली बार 'शिक्षा से रोजगार एवं उद्यम' स्थायी समिति के गठन की घोषणा की गई है। यह समिति कौशल विकास और रोजगार सृजन के लिए नई नीतियों और प्रस्तावों का मार्गदर्शन करेगी। सरकार का मानना है कि एवीजीसी उद्योग में 2030 तक 20 लाख पेशेवरों की आवश्यकता होगी, और इसी दृष्टिकोण से लैब्स और प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किए जाएंगे।

नई लैब्स और संस्थान
एवीजीसी कंटेंट क्रिएटर लैब्स की स्थापना इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजी, मुंबई की तकनीकी सहायता से की जाएगी। इसके अलावा, पूर्वी भारत में नए राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान की स्थापना की भी योजना है ताकि डिजाइन उद्योग के विस्तार और आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।

स्वास्थ्य क्षेत्र में कौशल और प्रशिक्षण
स्वास्थ्य और देखभाल सेवाओं में युवाओं के लिए अवसर बढ़ाने के लिए वृद्ध चिकित्सा और सहायक देखभाल सेवाओं को शामिल करते हुए मजबूत प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे। नेशनल स्किल क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क के अनुरूप डेढ़ लाख हेल्थकेयरगिवर्स को प्रशिक्षित करने की योजना है। साथ ही, ऑप्टोमेट्री, रेडियोलॉजी, एनेस्थिसिया, ओटी टेक्नोलॉजी, एप्लाइड साइकोलॉजी और व्यवहारिक स्वास्थ्य जैसे दस क्षेत्रों में नए प्रशिक्षण संस्थान खोले जाएंगे, जिससे अगले पांच वर्षों में एक लाख एएचपी पेशेवर तैयार होंगे।

कौशल विकास और बजट प्राथमिकताएँ
केंद्र सरकार ने कौशल विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय का बजट इस बार 62 प्रतिशत बढ़ाकर 9,885.80 करोड़ रुपये कर दिया है, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में यह 6,100 करोड़ रुपये था। सरकार का उद्देश्य सेवा क्षेत्र में भारत को वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनाना और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करना है।