नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच भारत ने पाकिस्तान की मध्यस्थ बनने की कोशिशों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। सूत्रों के अनुसार, सर्वदलीय बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत “पाकिस्तान जैसे दलाल देश” की तरह काम नहीं करेगा।

पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों पर भारत की प्रतिक्रिया

न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार यह टिप्पणी तब आई जब पाकिस्तान खुद को मध्य-पूर्व संकट में संभावित मध्यस्थ के रूप में पेश करने का प्रयास कर रहा था। भारत ने स्पष्ट किया कि उसकी विदेश नीति स्वतंत्र और सिद्धांत आधारित है, और वह किसी तीसरे पक्ष की भूमिका निभाने पर निर्भर नहीं रहेगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस बयान का मकसद वैश्विक मंच पर भारत की अलग और स्पष्ट स्थिति को स्थापित करना है। साथ ही यह टिप्पणी भारत-पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक तनाव को भी दर्शाती है।

सर्वदलीय बैठक में क्या हुआ?

सरकार ने बुधवार को बताया कि सर्वदलीय बैठक में विपक्ष को पश्चिम एशिया संकट के बारे में पूरी जानकारी दी गई। विपक्षी नेताओं ने भरोसा जताया कि संकट की इस घड़ी में वे सरकार द्वारा उठाए जाने वाले कदमों का समर्थन करेंगे।

संसदीय कार्य मंत्री किरन रीजीजू ने बैठक के बाद कहा,

“सभी नेताओं को धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होंने बैठक में भाग लिया। विभिन्न दलों ने अपनी चिंताएं साझा कीं। युद्ध के कारण उत्पन्न परिस्थिति और इसके भारत पर प्रभाव को लेकर कई सवाल उठाए गए, जिनका उत्तर सरकार ने दिया। अंत में सभी विपक्षी दलों ने कहा कि संकट के समय सरकार के कदमों का वे एकजुट होकर समर्थन करेंगे।”

विपक्ष और सरकार की एकजुटता

रीजीजू ने कहा कि विपक्ष ने सरकार के साथ एकजुटता दिखाते हुए परिपक्वता का परिचय दिया। उन्होंने यह भी बताया कि ईंधन सुरक्षा और अन्य उपायों पर विपक्ष ने संतोष जताया।

जब सवाल किया गया कि क्या विपक्ष संसद में इस मुद्दे पर चर्चा की मांग करेगा, तो रीजीजू ने कहा कि सरकार ने पर्याप्त जानकारी दे दी है और फिलहाल और जानकारी की आवश्यकता नहीं है।