नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से लंबित व्यापार समझौते पर आखिरकार सहमति बन गई है। इसके साथ ही अमेरिका ने भारत पर लगाए गए जवाबी टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। इस फैसले की घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत के बाद सोशल मीडिया के जरिए की।

इस समझौते के सामने आते ही देश की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने मंगलवार को इस डील को लेकर सरकार से पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। पार्टी ने खास तौर पर कृषि क्षेत्र को खोले जाने, टैरिफ को ‘शून्य’ करने और रूस से तेल खरीद से जुड़ी शर्तों पर सवाल उठाए हैं।

कांग्रेस ने उठाए कई अहम मुद्दे
कांग्रेस ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि जिस तरह युद्धविराम की घोषणा पहले अमेरिका की ओर से हुई थी, उसी तरह व्यापार समझौते का एलान भी राष्ट्रपति ट्रंप ने किया। पार्टी का कहना है कि ट्रंप के बयानों से संकेत मिलता है कि भारत अमेरिका के लिए अपने बाजार को व्यापक रूप से खोलने जा रहा है, जिससे घरेलू उद्योग, व्यापारी और किसान प्रभावित हो सकते हैं।

कांग्रेस ने यह भी पूछा कि यदि कृषि क्षेत्र को अमेरिकी उत्पादों के लिए खोला जा रहा है तो किसानों के हितों की सुरक्षा कैसे होगी। साथ ही, यह स्पष्ट करने की मांग की गई कि क्या भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद कर अमेरिका और वेनेजुएला से अधिक तेल लेने पर सहमति दी है। पार्टी ने सरकार से यह भी जानना चाहा कि ऐसे में ‘मेक इन इंडिया’ जैसी योजनाओं का भविष्य क्या होगा।

टैरिफ में बड़ी राहत
सोमवार रात राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत के जवाबी टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने का एलान किया। रूस से तेल खरीद के चलते लगाए गए अतिरिक्त शुल्क को भी हटाया जाएगा, जिससे भारत पर लागू कुल टैरिफ अब 18 प्रतिशत रह जाएगा।

अमेरिका से बड़े पैमाने पर खरीद का संकेत
ट्रंप के अनुसार, भारत ने अमेरिका से ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृषि, कोयला और अन्य क्षेत्रों में 500 अरब डॉलर से अधिक के उत्पाद खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। उन्होंने इसे दोनों देशों के रिश्तों के लिए एक नया और मजबूत अध्याय बताया।

फिलहाल कांग्रेस की मांग है कि मोदी सरकार इस पूरे समझौते का विस्तृत विवरण संसद और देश के सामने रखे, ताकि इसके आर्थिक और रणनीतिक प्रभावों को साफ तौर पर समझा जा सके।