नई दिल्ली। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने शुक्रवार को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव को ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना को लेकर एक विस्तृत पत्र लिखा। इसमें उन्होंने परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) में गंभीर खामियों और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया है।
यह पत्र ऐसे समय में आया है जब इस परियोजना को लेकर दोनों नेताओं के बीच पिछले कुछ वर्षों से लगातार संवाद और पत्राचार जारी है।
‘पर्यावरणीय आकलन दिशानिर्देशों से काफी कम’
अपने पत्र में रमेश ने लिखा कि 3 जून 2026 के उनके पहले पत्र के जवाब में 13 जून को मिले उत्तर से वे संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ग्रेट निकोबार परियोजना के विभिन्न हिस्सों का पर्यावरणीय आकलन मंत्रालय के तय मानकों के मुकाबले बेहद कमजोर और अपर्याप्त है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भी उठाए गए कई सवालों का सरकार की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं दिया गया है।
निगरानी रिपोर्ट और योजनाओं पर सवाल
कांग्रेस नेता ने कहा कि पर्यावरणीय मंजूरी की शर्तों के अनुसार हर छह महीने में अनुपालन रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए, लेकिन मार्च 2024 के बाद से ऐसी कोई रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि परियोजना निगरानी समिति की बैठकों का विवरण भी कई महीनों की देरी से अपलोड किया जा रहा है।
रमेश ने यह भी कहा कि 11 नवंबर 2022 की मंजूरी के अनुसार जिन संरक्षण और शमन योजनाओं को 15 दिनों के भीतर सार्वजनिक किया जाना था, वे अब तक सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध नहीं हैं। इनमें WII, SACON, ZSI, BSI, NIO, IIFM और अंडमान-निकोबार वन विभाग द्वारा तैयार की गई योजनाएं शामिल हैं।
कई अध्ययनों के बावजूद योजनाएं सार्वजनिक नहीं
उन्होंने कहा कि विभिन्न संस्थानों द्वारा किए गए कई अध्ययन और संशोधित पर्यावरण प्रबंधन योजनाएं भी सार्वजनिक नहीं की गई हैं। रमेश के अनुसार कम से कम एक दर्जन अध्ययन इस परियोजना से जुड़े हुए हैं, जो इसकी पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रवाल भित्तियों (coral reefs) के बड़े पैमाने पर स्थानांतरण जैसी योजनाएं व्यावहारिक रूप से लागू करना बेहद कठिन है।
परियोजना की पारिस्थितिकी पर चिंता
कांग्रेस नेता ने कहा कि ग्रेट निकोबार में प्रस्तावित ट्रांसशिपमेंट पोर्ट और अन्य विकास परियोजनाएं क्षेत्र की संवेदनशील पारिस्थितिकी के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि परियोजना से जुड़ी जानकारी को सार्वजनिक करने में अत्यधिक गोपनीयता बरती जा रही है।
इस मुद्दे पर कांग्रेस पहले भी केंद्र सरकार पर हमला कर चुकी है और इसे पर्यावरणीय विनाश का खतरा बता चुकी है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज
इस बीच, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी परियोजना को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए इसे एक बड़े कारोबारी हित से जोड़ने का आरोप लगाया है। उन्होंने हाल ही में इस विषय पर एक वीडियो जारी कर जनता से पर्यावरण संरक्षण के पक्ष में आवाज उठाने की अपील की थी।