केंद्र सरकार ने मणिपुर में हुई जातीय हिंसा की जांच कर रहे आयोग को एक बार फिर रिपोर्ट सौंपने के लिए अतिरिक्त समय प्रदान किया है। अब यह आयोग अपनी रिपोर्ट 20 नवंबर 2026 तक जमा कर सकेगा। गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में इस विस्तार की जानकारी दी गई है।

यह जांच आयोग 4 जून 2023 को गठित किया गया था, जिसका उद्देश्य मई 2023 में शुरू हुई मणिपुर हिंसा के कारणों, परिस्थितियों और प्रशासनिक प्रतिक्रिया की विस्तृत जांच करना है। उस समय भड़की हिंसा में 260 से अधिक लोगों की मौत हुई थी, जबकि हजारों लोग विस्थापित हो गए थे। कई घरों और संपत्तियों को भी भारी नुकसान पहुंचा था।

नेतृत्व में बदलाव

आयोग का प्रारंभिक नेतृत्व पूर्व गौहाटी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अजय लांबा कर रहे थे, जिन्होंने 28 फरवरी 2026 को पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद 1 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बलबीर सिंह चौहान को आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

जांच का दायरा

आयोग यह जांच कर रहा है कि 3 मई 2023 को शुरू हुई हिंसा किन परिस्थितियों में फैली और इसके पीछे कौन-कौन से कारण जिम्मेदार थे। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने में कितनी प्रभावी भूमिका निभाई और क्या किसी स्तर पर लापरवाही हुई।

हिंसा से पहले ही राज्य में तनाव की स्थिति बनी हुई थी। विशेष रूप से आरक्षित वन भूमि से जुड़े मामलों और कुकी समुदाय से संबंधित विवादों को लेकर कई विरोध प्रदर्शन और छोटे आंदोलन पहले से जारी थे, जो बाद में बड़े संघर्ष में बदल गए।

आयोग का गठन और समय विस्तार

मणिपुर सरकार की सिफारिश पर केंद्र सरकार ने इस आयोग का गठन किया था। इसे पहले भी कई बार समय विस्तार दिया जा चुका है—सितंबर 2024, दिसंबर 2024, मई 2025 और दिसंबर 2025 में इसकी समयसीमा बढ़ाई गई थी। अब यह पांचवां अवसर है जब आयोग को रिपोर्ट सौंपने के लिए अतिरिक्त समय मिला है।