नई दिल्ली: कांग्रेस ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्राइल दौरे पर तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी का कहना है कि यह यात्रा गलत समय पर हुई और इससे सैन्य तनाव बढ़ाने के लिए भारत की राजनीतिक समर्थन की छवि बन सकती है। कांग्रेस ने इसे भारत की ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के विपरीत भी बताया।
सलमान खुर्शीद का बयान
कांग्रेस के विदेश मामलों के विभाग के अध्यक्ष सलमान खुर्शीद ने कहा कि 25 और 26 फरवरी को पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और संभावित टकराव को देखते हुए, पीएम मोदी की इस्राइल यात्रा चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि इस यात्रा से “पक्षपाती झुकाव और बिना उकसावे के आक्रामक कार्रवाई को मौन समर्थन” की धारणा बन सकती है, जिसके गंभीर रणनीतिक परिणाम हो सकते हैं।
खुर्शीद ने यह भी कहा कि यह दौरा राष्ट्रीय चुनावों के समय किसी मौजूदा सरकार को अप्रत्यक्ष समर्थन का संदेश दे सकता है। उनका कहना था कि यह कदम संयुक्त राष्ट्र और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के सिद्धांतों के पूरी तरह खिलाफ है, खासकर किसी देश की क्षेत्रीय अखंडता और राजनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ बल प्रयोग पर।
जयराम रमेश की टिप्पणी
कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने भी पीएम मोदी की इस्राइल यात्रा की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यात्रा के दो दिन बाद ही इस्राइल और अमेरिका ने ईरान पर मिलकर हमले शुरू कर दिए। रमेश ने यह भी कहा कि मोदी की यात्रा “शर्मनाक” थी और इस युद्ध की पृष्ठभूमि में यह और भी नैतिक रूप से आपत्तिजनक हो गई।
रमेश ने आरोप लगाया कि भारत ने इस यात्रा के दौरान इस्राइल का समर्थन किया, और इसे एक तरह का राजनीतिक पुरस्कार भी माना जा सकता है।
भारत की परंपरागत विदेश नीति पर ध्यान
पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद ने जोर देते हुए कहा कि भारत की विदेश नीति वसुधैव कुटुंबकम, महात्मा गांधी के अहिंसा सिद्धांत और जवाहरलाल नेहरू की गुटनिरपेक्षता पर आधारित है। साथ ही, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 में अंतरराष्ट्रीय कानून और संधियों के पालन का निर्देश दिया गया है, जिसे इस यात्रा ने चुनौती दी।