राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने रविवार को स्पष्ट किया कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू करते समय समाज में किसी प्रकार का विभाजन नहीं होना चाहिए और इसे सभी वर्गों की राय को ध्यान में रखकर बनाया जाना चाहिए। संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में भागवत ने बताया कि उत्तराखंड में यूसीसी लागू करने से पहले लगभग तीन लाख सुझाव जुटाए गए और सभी हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के बाद कानून तैयार किया गया। उनका कहना था कि यही तरीका पूरे देश में अपनाया जाना चाहिए।
बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति पर भागवत का संदेश
भागवत ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर होने वाले अत्याचारों को लेकर कहा कि वहां 1.25 करोड़ हिंदू रह रहे हैं और यदि वे एकजुट हों तो अपने राजनीतिक और सामाजिक हितों की रक्षा कर सकते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अब लोग भागने की बजाय वहीं रहकर संघर्ष करने का निर्णय ले रहे हैं, और इस प्रयास में एकता सबसे अहम है। उन्होंने आश्वस्त किया कि हिंदुओं के हितों की रक्षा के लिए भारत और दुनिया के अन्य हिस्सों में हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
देश में बहुसंख्यक या अल्पसंख्यक की अवधारणा नहीं
भागवत ने कहा कि भारत में बहुसंख्यक या अल्पसंख्यक जैसी कोई कट्टरता नहीं है, हम सभी एक समाज का हिस्सा हैं। उन्होंने मुस्लिम और ईसाई समुदायों के साथ विश्वास, संवाद और मित्रता की जरूरत पर भी जोर दिया। धर्म की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि जब धर्म में आध्यात्मिक मूल्यों की कमी होती है, तो वह आक्रामक और हावी हो जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आज देखा जा रहा इस्लाम और ईसाई धर्म पैगंबर मोहम्मद और यीशु मसीह की मूल शिक्षाओं के अनुरूप नहीं हैं और सच्चे धर्म का पालन जरूरी है।
सावरकर को भारत रत्न मिलने से बढ़ेगी प्रतिष्ठा
राम मंदिर और अच्छे दिन के सवाल पर उन्होंने कहा कि संघ के लिए “अच्छे दिन” केवल भाजपा की सत्ता में आने से नहीं, बल्कि स्वयंसेवकों की मेहनत और संगठन की वैचारिक प्रतिबद्धता से आते हैं। राम मंदिर आंदोलन में संघ के साथ खड़े रहे लोग राजनीतिक लाभ उठाने में सफल रहे। उन्होंने वीडी सावरकर को भारत रत्न देने की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि इससे उनके योगदान की गरिमा और बढ़ेगी।
संघ और राजनीति का रिश्ता
भागवत ने संघ की राजनीतिक भूमिका पर कहा कि जरूरत पड़ने पर संघ सलाह देता है, लेकिन राजनीतिक दबाव मतदाताओं से आता है, संघ से नहीं। उन्होंने मजाक में कहा कि अक्सर राजनीतिक गलतियों का जिम्मा संघ पर डाल दिया जाता है। कम्युनिस्ट आंदोलनों पर उन्होंने टिप्पणी की कि यदि वे चाहें तो संघ उन्हें मार्गदर्शन दे सकता है।
संघ में युवा शक्ति
संघ की उम्र संरचना पर बोलते हुए भागवत ने बताया कि संगठन में स्वयंसेवकों की औसत उम्र 28 साल है और इसे 25 साल तक लाने का लक्ष्य है। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर उन्होंने कहा कि उन्होंने समझौते के विवरण नहीं देखे हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय लेन-देन में दोनों पक्षों के लाभ को सुनिश्चित करना आवश्यक है।