तमिलनाडु में राज्यपाल आर एन रवि और राज्य सरकार के बीच एक बार फिर खिंचाव देखने को मिला। आर एन रवि विधानसभा सत्र के दौरान संबोधन देने से पहले ही सदन छोड़कर बाहर चले गए। राज्यपाल ने राष्ट्रीय गान के तुरंत बाद राष्ट्रगान बजाने की मांग की थी, जिसे विधानसभा स्पीकर अप्पावु ने स्वीकार नहीं किया। इस कारण राज्यपाल ने सीधे सदन में शामिल हुए बिना अपने संबोधन का बहिष्कार कर दिया।
यह घटना राज्यपाल का तीसरा बार ऐसा व्यवहार है। इससे पहले उन्होंने 2024 और 2025 में भी विधानसभा में अपने संबोधन से इनकार किया था। तमिलनाडु लोकभवन ने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी प्रेस रिलीज के माध्यम से साझा की।
राज्यपाल का पक्ष:
सभा में अपने बहिष्कार के पीछे की वजह बताते हुए आर एन रवि ने कहा, "मुझे यह देखकर दुख हुआ कि राष्ट्रीय गान को उचित सम्मान नहीं दिया गया। मुझे अपनी जिम्मेदारियों का पूरी तरह पता है, लेकिन राष्ट्रगान को उचित सम्मान मिलना चाहिए।"
स्पीकर की प्रतिक्रिया:
स्पीकर अप्पावु ने राज्यपाल की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "विधानसभा में केवल विधायकों को अपनी राय व्यक्त करने का अधिकार है। किसी अन्य को अपने विचार थोपने का अधिकार नहीं है। सरकार ने राज्यपाल के संबोधन की पूरी तैयारी कर रखी थी।"
राज्यपाल ने कहा:
आर एन रवि ने यह भी आरोप लगाया कि "मेरा माइक बंद कर दिया गया और मुझे बोलने का मौका नहीं मिला। इससे मुझे अपमानित महसूस हुआ।"