भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने चीन से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि संसद में इस महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा नहीं हो रही, जबकि वह इसे उठाना चाहते थे। दुबे ने विपक्ष और उसके नेताओं, विशेषकर राहुल गांधी, पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उन्होंने लोकतंत्र में कभी इतनी कमजोर और “लीडर ऑफ प्रोपेगेंडा” जैसी भूमिका निभाने वाला विपक्ष नहीं देखा। उन्होंने कहा कि विपक्ष अपनी नासमझी को घमंड में बदलकर लगातार बयानबाजी कर रहा है।
1962 के युद्ध को लेकर टिप्पणी
दुबे ने 1962 के भारत-चीन युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय चीन भारत का पड़ोसी नहीं था। उन्होंने बताया कि 1950 में तिब्बत पर चीन का नियंत्रण स्थापित होने के बाद ही चीन भारत का पड़ोसी बना। उन्होंने कहा कि उस युद्ध में चीन ने करीब 38 हजार वर्ग किलोमीटर, जिसमें अक्साई चिन भी शामिल है, पर कब्जा किया और कई सवाल आज भी अनुत्तरित हैं।
पूर्व सरकारों पर आरोप
दुबे ने 1969 में तत्कालीन गृहमंत्री विद्याचरण शुक्ला के संसद में दिए गए बयान का हवाला देते हुए कहा कि चीन ने 1962 के बाद जासूसों और दूतावास के जरिए भारत में अपने आर्थिक और वैचारिक प्रभाव को बढ़ाने की कोशिश की। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर भी टिप्पणी की और कहा कि आज भी विपक्ष इस संवेदनशील विषय पर संसद में चर्चा से बच रहा है।
निशिकांत दुबे ने कहा कि यदि इस मुद्दे पर खुलकर चर्चा होती तो कई अहम बातें सामने आ सकती थीं, लेकिन विपक्ष ने इसे टालने की कोशिश की।