नई दिल्ली। लोकसभा में मंगलवार को स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विपक्ष और सरकार के बीच तीखी बहस देखने को मिली। विपक्ष के कई सांसदों ने सरकार और स्पीकर पर आरोप लगाए, तो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उनके दावे खारिज किए।
विपक्ष ने लगाए आरोप
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने अपने भाषण में कहा कि स्पीकर को पूर्ण निष्पक्षता के साथ कार्य करना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष को अक्सर बोलने नहीं दिया जाता और विपक्ष के नेताओं को माइक उपलब्ध नहीं कराया जाता। गोगोई ने कहा कि यह अविश्वास प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत बदले की भावना से नहीं लाया गया, बल्कि सदन की मर्यादा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बचाने के लिए जरूरी था।
सांसद ने कहा:
"हम इसे लाने में खुश नहीं हैं, बल्कि मजबूरी में इसे पेश किया गया। देश को यह जानना चाहिए कि संसद कैसे चलती है और कैसे आवाज दबाई जाती है।"
अमित शाह ने किया पलटवार
गौरव गोगोई के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए अमित शाह ने कहा कि स्पीकर का कार्यालय चुनाव के दौरान भी चलता रहता है और उनके आरोप गलत हैं। उन्होंने विपक्ष की व्याख्याओं को बेबुनियाद करार दिया और कहा कि स्पीकर ने सभी प्रक्रियाओं और प्रस्ताव पर बहस के लिए पर्याप्त उदारता दिखाई।
अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार ने कई सालों से डिप्टी स्पीकर की नियुक्ति नहीं की, जिससे संसदीय कार्य में वैक्यूम बन गया। वहीं, सरकार की ओर से रविशंक प्रसाद ने विपक्ष के आरोपों को पूरी तरह असत्य और निराधार बताया।
कार्यवाही स्थगित, बहस के लिए समय निर्धारित
हंगामा बढ़ने के कारण बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल, जो स्पीकर की चेयर पर थे, ने संसद की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी। उन्होंने कहा कि स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर कुल 10 घंटे की बहस के लिए सांसदों को समय दिया गया है और सभी को प्रस्ताव पर टिके रहने का निर्देश दिया गया।