नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने शनिवार को एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि एक दिन हिजाब पहनने वाली लड़की भारत की प्रधानमंत्री बनेगी। मसूद ने ओवैसी की इस टिप्पणी को “दिन में तारे देखने जैसी बात” करार दिया और कहा कि यह असंभव है।

सहारनपुर से सांसद मसूद ने एएनआई से बातचीत में कहा, “वह ऐसी बातें कर रहे हैं जो नामुमकिन हैं। लोकतंत्र में हर किसी को अपने फैसले लेने का अधिकार है, लेकिन हिजाब पहनना या न पहनना निजी मामला है। प्रधानमंत्री बनने की क्षमता किसी कपड़े या धर्म से नहीं जुड़ी।’’

ओवैसी ने यह बयान महाराष्ट्र के सोलापुर में एक चुनावी सभा में दिया था। उन्होंने कहा था कि भारत के संविधान की समावेशिता के कारण किसी भी नागरिक को प्रधानमंत्री बनने का अवसर मिल सकता है, चाहे वह हिजाब पहनती हो या न पहनती हो। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि पाकिस्तान के संविधान में धार्मिक आधार पर इस तरह की अनुमति नहीं है, जबकि भारत में किसी भी नागरिक को यह अधिकार है।

ओवैसी के इस बयान पर बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि संविधान किसी को रोकता नहीं, लेकिन पहले ओवैसी को अपनी पार्टी एआईएमआईएम में किसी पसमांदा या हिजाब पहनने वाली महिला को अध्यक्ष बनाने की चुनौती स्वीकार करनी चाहिए।

इसी बीच, शिवसेना की प्रवक्ता शायना एनसी ने कहा कि नेतृत्व क्षमता और जनता का समर्थन ही किसी व्यक्ति को प्रधानमंत्री बनने का आधार होना चाहिए। उन्होंने कहा, “भविष्य में किसी महिला को प्रधानमंत्री बनाया जा सकता है, लेकिन यह जाति, धर्म या समुदाय के आधार पर नहीं होना चाहिए। योग्यता और जनता का समर्थन सबसे महत्वपूर्ण हैं।’’

इस तरह, ओवैसी के बयान ने राजनीतिक दलों के बीच तीखी प्रतिक्रियाओं और बहस को जन्म दिया है, जिसमें सवाल उठाया गया है कि नेतृत्व पदों के लिए योग्यता, धर्म या परिधान का कितना महत्व होना चाहिए।