कोलकाता। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अपने विधानसभा क्षेत्र भवानीपुर में बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) और स्थानीय नेताओं के साथ शुक्रवार को हुई महत्वपूर्ण बैठक के अगले दिन शनिवार को मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया के दौरान तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई।
यह तनाव कोलकाता नगर निगम के वार्ड नंबर 70 स्थित सेंट जांस डायोसेसन गर्ल्स स्कूल में चल रही सुनवाई के दौरान देखा गया। मतदाताओं ने शिकायत की कि नाम सुधारने या पुनः शामिल करने के लिए जरूरी दस्तावेज जमा करने के बावजूद उन्हें कोई रसीद या पावती नहीं दी जा रही, जिससे भविष्य में किसी विवाद की स्थिति में उनके पास सबूत नहीं होगा।
स्थानीय लोगों ने यह भी चिंता जताई कि बिना पावती के उनका नाम मतदाता सूची से बाहर रहने पर उन्हें अपनी आपत्ति साबित करने का कोई तरीका नहीं मिलेगा। स्थिति बिगड़ते देख मौके पर स्थानीय पार्षद और मेयर परिषद सदस्य असीम बसु पहुंचे और प्रशासन की इस प्रक्रिया पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं की जानकारी में ‘तार्किक विसंगति’ पाई गई है, वे अपनी नागरिकता और पहचान साबित करने के लिए कई दस्तावेज जमा कर रहे हैं, लेकिन उन्हें रसीद न मिलना उनके अधिकारों का हनन है। बसु ने यह भी मांग की कि सभी मतदाताओं को पावती दी जाए ताकि जरूरत पड़ने पर वे न्यायालय का सहारा ले सकें।
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब मुख्यमंत्री स्वयं मतदाता सूची के मुद्दे पर बेहद सतर्क हैं। शुक्रवार को हुई बैठक में ममता ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि SIR स्क्रूटनी की दैनिक रिपोर्ट सीधे मेयर फिरहाद हकीम को सौंपा जाए, जो मुख्यमंत्री को नियमित रूप से ब्रीफ करेंगे।
भवानीपुर से करीब 45 हजार मतदाताओं के नाम प्रारंभिक सूची से हटा दिए गए थे, जिनमें अधिकांश को ‘मृत’ बताया गया। मुख्यमंत्री पहले ही चेतावनी दे चुकी थीं कि असली मतदाताओं के नाम हटाकर फर्जी नाम जोड़े जाने की आशंका है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अब रविवार को दिल्ली रवाना होंगी। वहां दो फरवरी को वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के सामने अपने 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बंगाल में चल रही SIR प्रक्रिया पर अपना पक्ष रखेंगी। भवानीपुर में शनिवार को हुई घटना ने अब चुनाव आयोग और राज्य सरकार के बीच की खींचतान को और बढ़ा दिया है।