नई दिल्ली। शिक्षा निदेशालय ने दिल्ली के स्कूलों में पढ़ाई के दिनों की संख्या को सुनिश्चित करने के लिए कड़ा कदम उठाया है। अब सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों को एकेडमिक सेशन शुरू होने से पहले लिखित रूप में भरोसा देना होगा कि वे पूरे साल तय मानकों के अनुसार क्लासेस चलाएंगे। इसके लिए स्कूलों के प्रिंसिपल से एफिडेविट लिया जाएगा, और निदेशालय ने इसका निर्धारित फॉर्मेट भी जारी कर दिया है।

शिक्षा अधिकारियों के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में यह देखा गया कि छुट्टियों, स्कूल इवेंट्स और अन्य गतिविधियों के कारण कई स्कूल पढ़ाई के दिनों को घटा देते हैं। इसका असर न सिर्फ सिलेबस की समय पर पूरी होने की प्रक्रिया पर पड़ता है, बल्कि छात्रों की पढ़ाई में लगातारता भी बाधित होती है। अब एफिडेविट सिस्टम से स्कूल प्रबंधन की जवाबदेही सीधे तय होगी और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में बाद में कार्रवाई की जा सकेगी।

निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि स्कूलों को एकेडमिक वर्ष की योजना बनाते समय छुट्टियों और कार्यदिवसों का कैलेंडर पहले से तय करना होगा। शिक्षा विभाग का कहना है कि यह कदम सेशन शुरू होने से पहले जारी किया गया है ताकि किसी भी तरह के भ्रम या मनमाने निर्णय की संभावना खत्म हो सके।

एकेडमिक सेशन 2026-27 1 अप्रैल, 2026 से शुरू होगा। गर्मी, पतझड़ और सर्दियों की छुट्टियां पहले ही तय कर दी गई हैं, ताकि स्कूल उसी के अनुसार अपनी पढ़ाई की योजना बना सकें। निदेशालय ने यह भी संकेत दिया कि जो स्कूल तय मानकों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

शिक्षा अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से न केवल बच्चों की पढ़ाई में निरंतरता बनी रहेगी, बल्कि स्कूलों के कामकाज में पारदर्शिता भी बढ़ेगी। माता-पिता भी आश्वस्त हैं कि इससे छुट्टियों के कारण पढ़ाई में बार-बार रुकावट की समस्या कम होगी।