जोधपुर। कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की मौत का मामला और गंभीर मोड़ ले गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का स्पष्ट कारण नहीं मिला है, लेकिन मेडिकल सूत्रों के मुताबिक साध्वी की छोटी और बड़ी आंत पर लाल निशान पाए गए हैं, जो अक्सर जहर के असर से उत्पन्न होते हैं। यदि जहर का संदेह सही साबित होता है, तो आगे की जांच में यह स्पष्ट हो जाएगा। इस बीच, विसरा (फेफड़े, यकृत, गुर्दा और आंत जैसे अंगों) की रासायनिक जांच चल रही है। FSL रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का असली कारण सामने आएगा।
आश्रम के बाहर मिली अस्थालाइन की बोतल
पुलिस ने बताया कि आश्रम के बाहर दो अस्थालाइन की बोतलें बरामद हुई हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या साध्वी को अस्थमा था। अस्थमा के मरीजों को अक्सर डेक्सोना इंजेक्शन दिया जाता है, जो स्टेरॉयड होता है और फेफड़ों की सूजन कम करता है। हालांकि, अधिक मात्रा में यह खतरनाक भी हो सकता है।
SIT का गठन
मामले की गंभीरता को देखते हुए जोधपुर पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश पासवान ने विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है। SIT की प्रमुख एसीपी छवि शर्मा हैं। टीम में शकील अहमद (SHO), राजीव भादू (SHO), प्राची गुर्जर (सब-इंस्पेक्टर), राकेश (ASI साइबर एक्सपर्ट) और अन्य पुलिसकर्मी शामिल हैं। पुलिस ने कहा कि जांच जारी है और जल्द ही महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद है।
पिता का बयान
साध्वी प्रेम बाईसा के पिता विरमनाथ ने मीडिया से कहा कि उनकी बेटी का बुधवार को कोई कार्यक्रम नहीं था। उन्हें हल्का जुकाम और गले में खराश थी, इसलिए एक कंपाउंडर को बुलाया गया। इसी दौरान उन्हें इंजेक्शन दिया गया। पिता का आरोप है कि इंजेक्शन लगने के 30 सेकंड के भीतर साध्वी की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें तुरंत निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पिता ने भावुक होकर कहा कि साध्वी ने अंतिम समय में कहा था, “जीते जी न्याय नहीं मिला, लेकिन मृत्यु के बाद सनातन न्याय ही दिलाएगा।” उन्होंने पुलिस और संत समाज से अपील की कि मामले की सच्चाई उजागर हो।
पैतृक गांव में अंतिम संस्कार
साध्वी प्रेम बाईसा का पार्थिव शरीर पैतृक गांव परेऊ लाया गया। शुक्रवार को श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में अंतिम दर्शन कराए गए। साधु-संतों की मौजूदगी में उनका दाह संस्कार किया गया और उन्हें समाधि दी गई।