पश्चिम बंगाल में भाजपा विधायक दल की बैठक के बाद नेतृत्व को लेकर तस्वीर साफ हो गई है। पार्टी ने शुभेंदु अधिकारी को विधायक दल का नेता चुन लिया है, जिसके साथ ही उनके राज्य के अगले मुख्यमंत्री बनने का रास्ता खुल गया है। वहीं अग्निमित्रा पॉल और निसिथ प्रमाणिक को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चा तेज है। आधिकारिक शपथ ग्रहण शनिवार को होगा।

जानकारी के मुताबिक, शुभेंदु अधिकारी शुक्रवार शाम राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार गठन का दावा पेश कर सकते हैं। इसके बाद शनिवार सुबह नई सरकार शपथ लेगी।

विधायक दल की बैठक में कई दिग्गज नेता रहे मौजूद

भाजपा विधायक दल की बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अलावा संगठन महामंत्री सुनील बंसल, अमित मालवीय, बिप्लब देब, निसिथ प्रमाणिक, अग्निमित्रा पॉल और शंकर घोष समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

ब्रिगेड परेड ग्राउंड में होगा शपथ ग्रहण

नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह शनिवार सुबह 10 बजे कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम रवींद्र जयंती के अवसर पर रखा गया है, जिसमें बंगाल की सांस्कृतिक झलक भी देखने को मिलेगी।

समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। इसके अलावा एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी कार्यक्रम में पहुंच सकते हैं।

संभावित मंत्रिमंडल को लेकर चर्चाएं तेज

नई सरकार के मंत्रिमंडल को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार दिलीप घोष, शंकर घोष, स्वपन दासगुप्ता, निसिथ प्रमाणिक, जितेंद्र तिवारी और शरदवत मुखर्जी को मंत्री पद मिल सकता है। नीलाद्रि शेखर, प्रणत टुडू, रुद्रनील घोष, दुधकुमार मंडल और बंकिम घोष के नाम भी चर्चा में बताए जा रहे हैं।

जीत में शुभेंदु अधिकारी की अहम भूमिका

चुनाव नतीजों के बाद से ही शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे माने जा रहे थे। ममता बनर्जी के प्रभाव वाले क्षेत्र भवानीपुर से जीत दर्ज करने के बाद उनकी दावेदारी और मजबूत हुई। राज्य की राजनीति और प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए पार्टी नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताया है।

विधानसभा चुनाव परिणाम

हालिया चुनाव में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्पष्ट बहुमत हासिल किया। पार्टी को 207 सीटें मिलीं, जबकि तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों पर सिमट गई। कांग्रेस और वाम दलों को 2-2 सीटें मिलीं, जबकि अन्य के खाते में 2 सीटें गईं।