तमिलनाडु की राजनीति में एक नया चेहरा तेजी से उभरता दिख रहा है, जिसे राज्य का संभावित “नया सुपरस्टार” माना जा रहा है। फिल्मी दुनिया के दिग्गज अभिनेता थलापति विजय अब राजनीतिक मंच पर भी मजबूत दावेदार के रूप में सामने आ रहे हैं।

पिछले कुछ वर्षों में जयललिता और करुणानिधि जैसे बड़े नेताओं के निधन के बाद राज्य की राजनीति में जिस नेतृत्व शून्य की बात की जा रही थी, उसे भरने की कोशिश अब विजय करते नजर आ रहे हैं। लगभग पांच दशकों से द्रविड़ राजनीति पर टिकी सत्ता संरचना में भी बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।

फिल्मी सितारों से बनी राजनीति की परंपरा

तमिलनाडु की राजनीति लंबे समय से सिनेमा जगत से प्रभावित रही है। एम. करुणानिधि, एम.जी. रामचंद्रन (एमजीआर) और जे. जयललिता जैसे नेताओं ने न सिर्फ फिल्मों में लोकप्रियता हासिल की, बल्कि राजनीति में भी मजबूत पकड़ बनाई।

हालांकि हाल के वर्षों में एमके स्टालिन और उनके बेटे उदयनिधि स्टालिन का नाम भी सामने आया, लेकिन उन्हें पहले के फिल्मी सितारा नेताओं जैसी लोकप्रियता हासिल नहीं हो सकी।

थलापति विजय की बढ़ती राजनीतिक पकड़

विजय, जिन्हें उनके फैंस “थलापति” (नेतृत्वकर्ता) के नाम से जानते हैं, अब राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। शुरुआती राजनीतिक रुझानों में उनकी पार्टी टीवीके कई जगहों पर दोनों प्रमुख द्रविड़ दलों—द्रमुक और अन्नाद्रमुक—को चुनौती देती नजर आ रही है।

कुछ सीटों पर उनकी पार्टी का प्रदर्शन इन दोनों पारंपरिक दलों से बेहतर बताया जा रहा है, जिससे राजनीतिक समीकरण बदलने की चर्चा तेज हो गई है।

विजय कौन हैं?

सी. जोसेफ विजय, जिन्हें जोसेफ विजय चंद्रशेखर के नाम से भी जाना जाता है, का जन्म 22 जून 1974 को हुआ था। उनके पिता एस. ए. चंद्रशेखर फिल्म निर्देशक हैं, जबकि उनकी मां शोभा चंद्रशेखर गायन से जुड़ी रही हैं।

विजय का संबंध तमिलनाडु के वेल्लालर समुदाय से है, जो मुख्य रूप से कृषि पृष्ठभूमि वाला समूह माना जाता है।

सिनेमा से सुपरस्टार बनने तक का सफर

विजय ने अपने करियर की शुरुआत बाल कलाकार के रूप में अपने पिता की फिल्मों से की थी। 1992 में उन्हें बतौर मुख्य अभिनेता लॉन्च किया गया, हालांकि शुरुआती फिल्म सफल नहीं रही।

इसके बाद 1993 की फिल्म ने उनके करियर को नई दिशा दी। धीरे-धीरे उन्होंने तमिल सिनेमा में अपनी पहचान मजबूत की और बड़े स्टार बन गए।

फैंस के बीच उनकी लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि उन्हें “इलैयाथलापति” और बाद में “थलापति” जैसे नामों से जाना जाने लगा।

राजनीति में औपचारिक प्रवेश

विजय ने 2024 में अपनी राजनीतिक पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कझगम (TVK)’ की स्थापना की। राजनीति पर फोकस करने के लिए उन्होंने फिल्मों से दूरी बनाने का निर्णय लिया और घोषणा की कि उनकी आगामी फिल्म उनके करियर की आखिरी फिल्म होगी।

अक्टूबर 2024 में उनकी एक बड़ी रैली ने राजनीतिक हलकों का ध्यान खींचा, जिसमें भारी संख्या में समर्थक जुटे।

फिल्मों से बना राजनीतिक आधार

विजय की फिल्मों में अक्सर सामाजिक मुद्दों—जैसे भ्रष्टाचार, शिक्षा, किसानों की समस्या और न्याय—को प्रमुखता से दिखाया गया है। यही वजह रही कि उनका एक मजबूत फैन बेस धीरे-धीरे राजनीतिक समर्थन में बदलने लगा।

उनके फैन क्लब्स लंबे समय से सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे हैं, जिसने जमीनी स्तर पर एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया है।

तमिल राजनीति में लंबे समय से द्रविड़ दलों का दबदबा

1967 के बाद से तमिलनाडु की राजनीति मुख्य रूप से द्रविड़ विचारधारा पर आधारित रही है। द्रमुक और अन्नाद्रमुक ने लगातार सत्ता में प्रमुख भूमिका निभाई है।

इन दोनों दलों को अक्सर फिल्मी सितारों के प्रभाव से फायदा मिलता रहा है—पहले एमजीआर और जयललिता, और द्रमुक की तरफ से करुणानिधि इसका उदाहरण रहे हैं।

क्या बदल रहा है राजनीतिक समीकरण?

अब थलापति विजय और उनकी पार्टी टीवीके के उभार को इस पारंपरिक राजनीतिक ढांचे के लिए एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह नया प्रवेश तमिलनाडु की राजनीति में लंबे समय से चले आ रहे द्रविड़ वर्चस्व को चुनौती दे सकता है।