मणिपुर के पहाड़ी और घाटी क्षेत्रों में हाल के दिनों में हुई हिंसक घटनाओं और उसके बाद शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों ने हालात को लगातार तनावपूर्ण बनाए रखा है। दो अलग-अलग घटनाओं के बाद राज्य के कई हिस्सों में बंद और प्रदर्शन का असर साफ दिखाई दे रहा है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
प्रदर्शन के चलते कई जिलों में बाजार बंद रहे, स्कूल-कॉलेजों में ताले लगे रहे और सार्वजनिक परिवहन भी लगभग ठप रहा।
बच्चों की मौत से भड़का विवाद
मामले की शुरुआत 7 अप्रैल को बिष्णुपुर जिले के ट्रोंग्लाओबी इलाके में हुई एक घटना से मानी जा रही है। देर रात एक घर पर हुए विस्फोट में एक पांच वर्षीय बच्चे और उसकी छह माह की बहन की मौत हो गई, जबकि उनकी मां गंभीर रूप से घायल हो गईं। इस घटना ने स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया, जिसके बाद 11 अप्रैल से लगातार विरोध प्रदर्शन जारी हैं।
सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों में टकराव
प्रदर्शनों के दौरान चुराचांदपुर जिले के गेलमोल गांव में हालात और बिगड़ गए, जहां प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हो गई। इस दौरान सीआरपीएफ की कार्रवाई में तीन प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई, जिससे तनाव और बढ़ गया।
स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने 7 अप्रैल को तीन दिनों के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी थीं। बाद में 8 अप्रैल को कुछ सेवाएं शर्तों के साथ बहाल कर दी गईं, जबकि मोबाइल इंटरनेट पर रोक कुछ समय तक जारी रही। शनिवार को मोबाइल इंटरनेट प्रतिबंध भी हटा लिया गया।
इम्फाल में झड़प, कई घायल
शनिवार को इम्फाल के थांगमेइबंद इलाके में मशाल जुलूस के दौरान एक बार फिर हालात बिगड़ गए। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़प में छह लोग घायल हो गए, जिनमें तीन सीआरपीएफ जवान भी शामिल हैं।
सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को ख्वैराम्बंद इमा मार्केट की ओर बढ़ने से रोका, जिसके बाद थांगमेइबंद, सगोलबंद और उरीपोक क्षेत्रों में तनाव फैल गया। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस, रबर बुलेट और कुछ स्थानों पर हवाई फायरिंग का सहारा लिया, जबकि प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी और गुलेल से जवाब दिया।
बंद का ऐलान और विरोध तेज
इन घटनाओं के बाद कई सामाजिक संगठनों, जिनमें मैरा पैबी (मेइती महिलाओं का समूह) शामिल है, ने रविवार रात से पांच दिन के पूर्ण बंद का ऐलान किया है।
इसी बीच यूनाइटेड नागा काउंसिल ने भी 18 अप्रैल को हुए एक हमले के विरोध में अलग से बंद की घोषणा की है, जिसमें एक सेवानिवृत्त सेना जवान की हत्या कर दी गई थी।
न्याय की मांग पर अड़े प्रदर्शनकारी
लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच लोग सड़कों पर उतरकर न्याय की मांग कर रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब तक पीड़ितों को न्याय नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा और विरोध प्रदर्शन और तेज होंगे।