ईरान को लेकर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित संभावित टैरिफ नीति ने भारत में चिंता बढ़ा दी है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर अमेरिका अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगा सकता है। इस प्रस्ताव पर विदेश मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष और कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने गंभीर आशंका जताई है।
बुधवार, 14 जनवरी को समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में शशि थरूर ने कहा कि अमेरिकी टैरिफ नीति लंबे समय से भारतीय निर्यातकों के लिए चुनौती बनी हुई है। उनका कहना था कि अत्यधिक शुल्क के कारण भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में टिके रहना मुश्किल हो सकता है।
प्रतिस्पर्धी देशों को कम शुल्क, भारत पर ज्यादा बोझ
थरूर ने बताया कि भारत पर पहले से ही 25 प्रतिशत का प्रारंभिक टैरिफ लागू है, जो अपने आप में चिंता का विषय है। इसके मुकाबले दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देश—जैसे वियतनाम, थाईलैंड, इंडोनेशिया—और यहां तक कि पाकिस्तान व बांग्लादेश पर भी 15 से 19 प्रतिशत के बीच ही शुल्क लगाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ये देश उन्हीं श्रम-प्रधान क्षेत्रों में भारत के प्रतिद्वंद्वी हैं, जिनमें भारत अमेरिका को निर्यात करता है। इसमें रत्न और आभूषण, समुद्री उत्पाद, झींगा और चमड़ा उद्योग जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
टैरिफ 75% तक पहुंचने की आशंका
शशि थरूर के अनुसार, रूस से जुड़े प्रतिबंधों के चलते भारतीय निर्यात पर पहले ही 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क जुड़ चुका है, जिससे कुल टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यदि ईरान से जुड़े प्रतिबंधों के कारण इसमें और 25 प्रतिशत जोड़ दिया गया, तो कुल शुल्क 75 प्रतिशत हो जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इतनी ऊंची दर पर कोई भी भारतीय कंपनी अमेरिका को सफलतापूर्वक निर्यात नहीं कर पाएगी। थरूर ने इसे भारत के लिए गंभीर आर्थिक चुनौती बताते हुए अमेरिकी टैरिफ नीति पर पुनर्विचार की आवश्यकता पर जोर दिया।