नई दिल्ली: व्यस्त जीवनशैली के बीच जब समय की कमी होती है तो कई लोग पैकेटबंद और अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स (UPFs) का सहारा लेते हैं। ऑफिस में काम करते समय, फिल्म देखते हुए या छुट्टी के दिन स्नैक्स के तौर पर इनका सेवन आम हो गया है। हालांकि, हाल ही में सामने आई एक रिसर्च ऐसे खाद्य पदार्थों को लेकर गंभीर चिंता जताती है। अध्ययन के अनुसार, इनका अधिक सेवन व्यक्ति की एकाग्रता (फोकस) पर नकारात्मक असर डाल सकता है और लंबे समय में डिमेंशिया जैसी न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का खतरा भी बढ़ा सकता है।
रिसर्च में क्या सामने आया?
ऑस्ट्रेलिया की मोनाश यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स का अधिक सेवन डिमेंशिया के जोखिम से जुड़ा हो सकता है। यह रिसर्च नवंबर 2016 से दिसंबर 2023 के बीच की गई, जिसमें 40 से 70 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 2,100 लोगों को शामिल किया गया।
शोधकर्ताओं के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की रोजाना की डाइट में अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स की मात्रा 10 प्रतिशत बढ़ जाती है, तो उसकी फोकस करने की क्षमता धीरे-धीरे प्रभावित होने लगती है। अध्ययन में यह भी कहा गया कि भले ही भोजन में अन्य हेल्दी चीजें शामिल हों, फिर भी अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स का नकारात्मक प्रभाव बना रह सकता है। शोध के मुताबिक, रोजाना एक पैकेट चिप्स खाना भी इस 10 प्रतिशत वृद्धि के बराबर माना जा सकता है।
क्या होते हैं अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स?
अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स (UPFs) ऐसे खाद्य पदार्थ होते हैं, जिनमें ऐसे कई तत्व मिलाए जाते हैं जो सामान्य घरेलू रसोई में इस्तेमाल नहीं किए जाते। इनमें प्रिजर्वेटिव, इमल्सीफायर, आर्टिफिशियल स्वीटनर, अतिरिक्त फैट और कृत्रिम रंग शामिल होते हैं। इन्हें तैयार करने के लिए मोल्डिंग और एक्सट्रूज़न जैसी औद्योगिक तकनीकों का उपयोग किया जाता है। चिप्स, कैंडी, एनर्जी ड्रिंक और कई पैकेटबंद स्नैक्स इसी श्रेणी में आते हैं।
डिमेंशिया समेत कई बीमारियों का बढ़ सकता है जोखिम
रिसर्च के मुताबिक, अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स का नियमित सेवन केवल डिमेंशिया ही नहीं, बल्कि हृदय रोग और मोटापे जैसी समस्याओं के खतरे को भी बढ़ा सकता है। अध्ययन में कहा गया है कि इनमें मौजूद प्रिजर्वेटिव, आर्टिफिशियल स्वीटनर, अतिरिक्त फैट और रंग सोचने-समझने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं।
हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस अध्ययन में पैकेटबंद खाद्य पदार्थों और याददाश्त खोने (मेमोरी लॉस) के बीच कोई प्रत्यक्ष संबंध स्थापित नहीं हुआ है।
Source: Monash University