नई दिल्ली। तेजी से बदलती जीवनशैली के बीच बच्चों और किशोरों का शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य गंभीर चुनौती की ओर बढ़ता दिख रहा है। हाल ही में सामने आई एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट ने इस दिशा में चिंता बढ़ाने वाले आंकड़े पेश किए हैं।

‘लांसेट कमीशन ऑन एडोलसेंट हेल्थ’ की रिपोर्ट के अनुसार, यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो वर्ष 2030 तक दुनिया भर में करीब एक अरब से अधिक किशोर ऐसी परिस्थितियों में होंगे, जहां अवसाद, मोटापा और गंभीर चोटें उनके स्वास्थ्य पर बड़ा खतरा बन सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन समस्याओं को रोका जा सकता है, लेकिन इसके लिए तुरंत और ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

मानसिक स्वास्थ्य पर बढ़ता दबाव

रिपोर्ट में बताया गया है कि किशोरों में अवसाद और चिंता जैसी मानसिक समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। अनुमान है कि 2030 तक लाखों युवाओं के स्वस्थ जीवन वर्ष मानसिक विकारों के कारण प्रभावित हो सकते हैं। इसके अलावा, करीब 46 करोड़ से अधिक युवा मोटापे की समस्या से जूझ रहे होंगे, जो आगे चलकर डायबिटीज और हृदय रोगों का खतरा बढ़ा सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, किशोरावस्था एक बेहद संवेदनशील चरण होता है, जहां नींद और मानसिक संतुलन में छोटे बदलाव भी लंबे समय तक असर डाल सकते हैं।

स्मार्टफोन और जीवनशैली का प्रभाव

रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि कम उम्र में स्मार्टफोन का उपयोग बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल रहा है। 12 साल से पहले मोबाइल मिलने वाले बच्चों में अवसाद और मोटापे का जोखिम अधिक देखा गया है। साथ ही, अत्यधिक स्क्रीन टाइम से नींद की गुणवत्ता और दैनिक दिनचर्या भी प्रभावित हो रही है।

सुरक्षा जोखिम भी बड़ी चुनौती

10 से 24 वर्ष की उम्र के युवाओं में आज भी मौत के प्रमुख कारणों में सड़क दुर्घटनाएं और अन्य सुरक्षा संबंधी घटनाएं शामिल हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह आयु वर्ग केवल स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी संवेदनशील है।

बचाव के सुझाव

विशेषज्ञों ने बच्चों के स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन के लिए कुछ जरूरी सुझाव दिए हैं—

  • बच्चों का स्क्रीन टाइम सीमित करना और उन्हें शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रेरित करना
  • माता-पिता और बच्चों के बीच संवाद बढ़ाना
  • ऑनलाइन गतिविधियों और मानसिक स्थिति पर नजर रखना
  • व्यवहार में बदलाव जैसे चिड़चिड़ापन, गुमसुम रहना या खान-पान में बदलाव पर ध्यान देना

साइबर बुलिंग बन रही नई चुनौती

डिजिटल युग में साइबर बुलिंग बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरे के रूप में उभर रही है। सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर उत्पीड़न के कारण कई बच्चे डर, शर्मिंदगी और अवसाद का शिकार हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक स्क्रीन उपयोग बच्चों के मानसिक विकास को भी प्रभावित कर सकता है।

रिपोर्ट किसने तैयार की

यह अध्ययन यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन, यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न और अन्य संस्थानों के विशेषज्ञों द्वारा तैयार किया गया है और इसे ‘द लांसेट’ जर्नल में प्रकाशित किया गया है। रिपोर्ट बच्चों के स्वास्थ्य, जीवनशैली और सुरक्षा को लेकर एक गंभीर चेतावनी के रूप में सामने आई है।