नई दिल्ली। कई लोग शुगर के लक्षण महसूस होने के बाद एचबीए1सी (HbA1c) रिपोर्ट सामान्य रेंज में आने पर राहत महसूस कर लेते हैं। लेकिन अगर खानपान में सतर्कता नहीं बरती जाती और जीवनशैली में बदलाव नहीं किए जाते, तो यह स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
हालांकि, एचबीए1सी रिपोर्ट सामान्य से ऊपर आने पर भी घबराना जरूरी नहीं है। इस टेस्ट में उतार-चढ़ाव कई कारणों से हो सकता है। इस विषय पर डॉ. राजेश खड़गावत, एंडोक्राइनोलॉजिस्ट, एम्स, नई दिल्ली का कहना है कि इसका मुख्य कारण एनीमिया यानी शरीर में हीमोग्लोबिन या लाल रक्त कोशिकाओं का स्तर कम होना हो सकता है।
विशेषकर भारतीयों में हीमोग्लोबिन और शुगर का जुड़ाव (ग्लाइकेशन) दूसरे देशों की तुलना में अलग हो सकता है। ऐसे में एचबीए1सी का स्तर अधिक दिखना असल में मधुमेह की पुष्टि नहीं करता।
एचबीए1सी पर पूरी तरह भरोसा करने के नुकसान
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यदि किसी स्वस्थ व्यक्ति की रिपोर्ट गलती से अधिक दिख जाए, तो उन्हें अनावश्यक दवाइयां दी जा सकती हैं और मानसिक तनाव बढ़ सकता है।
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वहीं, जिन लोगों में सच में मधुमेह है, उन्हें समय पर पता न चलने से जटिलताएं बढ़ सकती हैं। खासकर टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों के लिए कई तरह की जांच जरूरी होती हैं।
एचबीए1सी जांच क्या बताती है
यह टेस्ट पिछले कुछ महीनों में रक्त में शुगर का औसत स्तर दिखाता है। आमतौर पर 6.5 प्रतिशत या उससे ऊपर होने पर डायबिटीज माना जाता है। लेकिन सिर्फ इसी संख्या के आधार पर इलाज शुरू करना सही नहीं है।
समाधान क्या है
एचबीए1सी को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता, लेकिन योग्य चिकित्सक केवल इसी टेस्ट के आधार पर निर्णय नहीं लेते। वे फास्टिंग ब्लड शुगर और ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट (OGTT) करवाने की सलाह देते हैं। इसके अलावा शुगर के कुछ खास लक्षण जैसे अधिक प्यास लगना, भूख बढ़ना, वजन कम होना या थकान भी ध्यान में रखे जाते हैं।
डॉ. खड़गावत का कहना है कि शुगर जांच केवल नंबर देखकर नहीं, बल्कि व्यक्ति की पूरी स्थिति को देखकर करनी चाहिए। इसलिए अगर कोई व्यक्ति शुगर के लक्षण महसूस करता है, तो फास्टिंग शुगर, आयरन, होमोग्लोबिन, लिपिड प्रोफाइल और किडनी जांच सहित संपूर्ण टेस्ट करवाकर चिकित्सक से सलाह लेना सबसे सुरक्षित उपाय है।