नई दिल्ली। आज की डिजिटल दुनिया को विशेषज्ञ “डिस्ट्रैक्शन इकोनमी” यानी ध्यान भटकाने वाली अर्थव्यवस्था कहा जा रहा है। यह ऐसा माहौल है जहां हर पल हमारा ध्यान खींचने के लिए अलग-अलग सूचनाएं, नोटिफिकेशन और कंटेंट मौजूद रहते हैं। इसका असर लोगों की एकाग्रता पर साफ दिखता है, जिससे फोकस की कमी, मानसिक थकान और चिंता जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।

लगातार टूटता ध्यान और ‘फ्लो’ की कमी

अब किसी भी काम में पूरी तरह डूब जाना पहले की तुलना में काफी दुर्लभ हो गया है। “फ्लो” एक ऐसी मानसिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति किसी गतिविधि में इतना गहराई से जुड़ जाता है कि बाहरी दुनिया का ध्यान लगभग खत्म हो जाता है। इस स्थिति में काम करना न सिर्फ आसान लगता है, बल्कि यह अनुभव खुद में काफी संतोषजनक भी होता है।

फ्लो स्टेट क्या है?

विशेषज्ञों के अनुसार फ्लो एक ऐसी अवस्था है जिसमें व्यक्ति पूरी तरह वर्तमान कार्य में लीन हो जाता है। इस दौरान बाहरी शोर, सोशल मीडिया या अन्य विकर्षणों का प्रभाव कम हो जाता है और मन एक स्थिर दिशा में केंद्रित रहता है।

न्यूरोसाइंस से जुड़े अध्ययनों के अनुसार फ्लो स्टेट में मस्तिष्क के वे हिस्से कम सक्रिय हो जाते हैं जो आत्म-विश्लेषण और भटकते विचारों से जुड़े होते हैं। इससे ध्यान अधिक स्थिर और प्रभावी हो जाता है।

फ्लो और हाइपरफोकस में अंतर

हालांकि फ्लो को अक्सर हाइपरफोकस समझ लिया जाता है, लेकिन दोनों में अंतर है। शोध बताते हैं कि हाइपरफोकस अनियंत्रित और अचानक होने वाली स्थिति हो सकती है, जबकि फ्लो एक उद्देश्यपूर्ण और नियंत्रित मानसिक अवस्था होती है।

एडीएचडी से जुड़े एक अध्ययन में पाया गया कि ऐसे लोग जिनमें लक्षण अधिक थे, उनमें हाइपरफोकस तो देखा गया लेकिन फ्लो का अनुभव अपेक्षाकृत कम रहा। इसका मुख्य अंतर नियंत्रण और संतुलन का है।

फ्लो कैसे हासिल करें?

विशेषज्ञों के अनुसार शौक और नियमित गतिविधियां फ्लो स्टेट पाने का सबसे अच्छा माध्यम हो सकती हैं। खेल, संगीत या किसी रचनात्मक काम में लंबे समय तक ध्यान लगाना इस स्थिति को बढ़ावा देता है।

टेनिस खिलाड़ियों और युवा एथलीट्स पर किए गए अध्ययनों में पाया गया कि जो खिलाड़ी अपने प्रदर्शन पर ध्यान और नियंत्रण बनाए रखते हैं, वे अधिक बार फ्लो स्टेट में पहुंचते हैं।

फोकस से बेहतर प्रदर्शन और संतुष्टि

शोध यह भी बताते हैं कि फ्लो स्टेट केवल प्रदर्शन ही नहीं बढ़ाता, बल्कि मानसिक संतुष्टि भी देता है। कई मामलों में यह सामाजिक इंटरैक्शन से मिलने वाली खुशी से भी अधिक गहरी संतुष्टि प्रदान कर सकता है।

हालांकि, यह भी देखा गया है कि गेमिंग या किसी गतिविधि में फ्लो इतना गहरा हो सकता है कि समय का अंदाजा ही नहीं रहता, जिससे नींद और दिनचर्या प्रभावित हो सकती है।