दो साल बाद मोहनलालगंज की आवासीय योजनाओं पर काम शुरू, 8 लाख लोगों को मिलेगा आशियाना

HIGHLIGHTS
- करीब दो साल बाद योजनाओं को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया शुरू हुई।
- दो से नौ अगस्त तक किसानों के साथ चर्चा की गई।
- लैंड पूलिंग के तहत जमीन लेने की तैयारी चल रही है।
लखनऊ। करीब दो साल के इंतजार के बाद मोहनलालगंज क्षेत्र में भूमि विकास एवं गृहस्थान योजना को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। नियोजन समिति की बैठक के बाद दो से नौ अगस्त तक किसानों के साथ चर्चा की गई। अब लैंड पूलिंग की दरें निर्धारित कर आपसी सहमति के आधार पर जमीन लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
लखनऊ विकास प्राधिकरण की दो आवासीय योजनाओं के साथ उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद की मोहनलालगंज में दो आवासीय योजनाएं भी शुरू होने जा रही हैं। इन योजनाओं के लिए किसानों की सहमति से लैंड पूलिंग नियम के तहत करीब 4500 एकड़ भूमि जुटाई जाएगी। यहां आठ लाख से अधिक लोगों के लिए आवास उपलब्ध कराने की योजना है।
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और सुलतानपुर रोड से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर गोसाईगंज के पास भूमि विकास एवं गृहस्थान योजना मोहनलालगंज-1 के लिए परिषद ने 18 अक्टूबर 2023 को बोर्ड बैठक में मंजूरी दी थी। इसके बाद 18 जनवरी 2024 को बोर्ड ने मोहनलालगंज भूमि विकास एवं गृहस्थान योजना-3 को भी स्वीकृति प्रदान की थी।
आवास विकास परिषद के लखनऊ जोन के उप आवास आयुक्त चंदन पटेल ने बताया कि किसानों की सहमति के आधार पर जमीन लेने से पहले नियोजन समिति की बैठक हो चुकी है। अब लैंड पूलिंग नियम के तहत दोनों योजनाओं के लिए साढ़े चार हजार एकड़ जमीन जुटाई जाएगी। जमीन की कीमत निर्धारित कराने की प्रक्रिया चल रही है।
दोनों योजनाओं को एक साथ विकसित किया जाएगा। इनमें करीब दो लाख घर बनाए जाएंगे, जिनमें आठ लाख लोग रह सकेंगे। योजनाओं की सभी सड़कें फोर लेन और मुख्य मार्ग सिक्स लेन होंगे। जरूरत के अनुसार फ्लाईओवर और अंडरपास भी बनाए जाएंगे। सुविधाओं के विकास पर करीब 25 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
योजना संख्या एक में शामिल गांव
मोहनलालगंज क्षेत्र के चांद सराय, कासिमपुर, बिरूहा, हबुआपुर, मोअज्जम नगर, सठवारा, सिद्धपुरा, भटवारा, पहाड़ नगर टिकरिया, कबीरपुर, मगहुआ और बेली गांव की भूमि चिन्हित की गई है।
योजना संख्या तीन में शामिल गांव
मोहनलालगंज के देहरामऊ, पहासा, बेली, शिथौलीकला, शिवलर और हबुअबापुर गांव की भूमि योजना के लिए प्रस्तावित की गई है।
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