दरभंगा। बिहार के दरभंगा जिले में 14 वर्षीय मूक-बधिर किशोर को लेकर सोमवार को विवाद गहराया, जब दो अलग-अलग परिवार ने उसे अपना पुत्र होने का दावा किया। दोनों पक्षों ने कागजी साक्ष्य पेश किए, लेकिन सत्यापन के लिए किशोर को बाल संरक्षण गृह सौंप दिया गया है।
किशोर की असली पहचान और परिवार निर्धारित करने के लिए उसकी आंखों की पुतली की जांच कराई गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किशोर का वास्तविक परिवार कौन है।
मामला कैसे शुरू हुआ
पांच महीने पहले सारण जिले के मांझी थानाक्षेत्र से एक मूक-बधिर किशोर लापता हो गया था। वहीं, दरभंगा के बिरौल थानाक्षेत्र से सात साल पहले भी एक समान घटना हुई थी। दोनों परिवारों ने प्राथमिकी दर्ज नहीं करवाई, लेकिन अपने स्तर पर बच्चों की तलाश करते रहे।
दिसंबर में कटिहार में एक मखाना व्यवसायी के घर किशोर का डांस वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुआ। इस वीडियो को देखकर दरभंगा के रामप्रकाश मुखिया और उनकी पत्नी नेंगरी देवी कटिहार पहुंचे और किशोर को अपना पुत्र श्याम सुंदर मुखिया होने का दावा किया।
एक महीने बाद वीडियो वायरल होने के बाद सारण जिले से विष्णुदेव यादव की पत्नी उषा देवी भी आईं और किशोर को अपना पुत्र राहुल कुमार यादव बताने लगीं। दोनों पक्षों ने आधार कार्ड और राशन कार्ड जैसे साक्ष्य भी पेश किए, लेकिन पुरानी और धुंधली तस्वीरों के कारण स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई।
बाल गृह में सुरक्षित किशोर
जांच की प्रक्रिया के तहत किशोर को बाल कल्याण समिति के निर्देश पर भराठी स्थित बाल संरक्षण गृह भेजा गया। बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारी ने आधार कार्ड सत्यापन कराया, लेकिन उम्र के कारण अपडेट की आवश्यकता पाई गई। किशोर की आंखों की पुतली की जांच रिपोर्ट अगले 15–30 दिनों में आने की संभावना है।
इस बीच, दोनों परिवार रिपोर्ट के परिणाम की प्रतीक्षा कर रहे हैं। बाल कल्याण पुलिस ने किशोर को सुरक्षित रखा है और कानून के पालन के निर्देश दोनों पक्षों को दिए गए हैं।
स्थानीय प्रतिक्रिया
किशोर के मूक-बधिर और मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के बावजूद दोनों परिवारों की ममता को देख लोग हैरान हैं। क्षेत्र में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।