पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार अब जनता दल यूनाईटेड (जदयू) के सदस्य बन गए हैं। वीर चंद्र पटेल रोड स्थित जदयू प्रदेश कार्यालय में हजारों कार्यकर्ताओं की उपस्थिति में कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने उन्हें औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता दिलाई।
इस मौके पर निशांत कुमार ने कहा, "मैं जदयू के सभी कार्यकर्ताओं, नेताओं और बिहार की जनता को नमन करता हूँ। आज से मैं पार्टी का सदस्य बन चुका हूँ और एक समर्पित कार्यकर्ता के रूप में सेवा करता रहूँगा। मेरे पिता ने राज्यसभा जाने का निजी फैसला लिया है, जिसका मैं सम्मान करता हूँ। मैं उनकी उपलब्धियों को जनता तक पहुँचाने का काम जारी रखूंगा और विश्वास पर खरा उतरने की कोशिश करूंगा।"
वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं को किया नमन
सदस्यता ग्रहण करने के बाद निशांत कुमार ने जदयू के वरिष्ठ नेताओं के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और कार्यकर्ताओं का धन्यवाद किया। सुबह से ही राज्य के विभिन्न जिलों से पार्टी के नेता और कार्यकर्ता जदयू कार्यालय पहुंचे। उत्साहित समर्थक हाथी और घोड़े लेकर भी आए। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और निशांत के समर्थन में जोरदार नारेबाजी हुई।
कार्यकर्ताओं का कहना था कि निशांत कुमार की जदयू में एंट्री से संगठन में नई ऊर्जा आएगी। इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि वाले निशांत कुमार को बिहार के विकास कार्यों में अपने पिता की तरह योगदान देने की उम्मीद है।
पूरा बिहार का दौरा करेंगे निशांत कुमार
जदयू के वरिष्ठ नेता और एमएलसी नीरज कुमार ने बताया कि सदस्यता लेने के बाद निशांत कुमार जल्द ही पूरे बिहार का दौरा करेंगे और संगठन से जुड़ी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। पार्टी के सभी विधायकों, सांसदों और विधान परिषद सदस्यों ने उनका स्वागत किया। पार्टी सूत्रों के अनुसार, निशांत कुमार को जल्द ही बड़ी जिम्मेदारियाँ सौंपी जा सकती हैं। कई कार्यकर्ताओं की इच्छा है कि भविष्य में निशांत ही बिहार के मुख्यमंत्री बनें।
पार्टी नेताओं के साथ बैठक
इससे एक दिन पहले, शनिवार को निशांत कुमार ने जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के आवास पर पार्टी के विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की। बैठक में मंत्री श्रवण कुमार और अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। इस दौरान निशांत ने संगठन की गतिविधियों और राज्य के विकास से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय साझा की।
निशांत कुमार की जदयू में शामिल होने से पार्टी में नई उम्मीद और जोश देखने को मिला है, और अब यह देखना बाकी है कि वह आगामी चुनाव और संगठनात्मक गतिविधियों में किस तरह अपनी भूमिका निभाते हैं।