रायपुर। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद छत्तीसगढ़ की सियासत में हलचल बढ़ गई है। इस पर भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने अपने बेटे को बचाया, जबकि शराब घोटाले के मामले में जेल में बंद पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा की अनदेखी की जा रही है।
भूपेश बघेल हाल ही में रायपुर के सेंट्रल जेल में कवासी लखमा से मिलने पहुंचे और उन्होंने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि लखमा का स्वास्थ्य फिलहाल ठीक है। पिछली बार उन्हें सीने और पैरों में दर्द की शिकायत थी, जिसके बाद उन्होंने डीजीपी को पत्र लिखा। जांच और दवाइयों के बाद लखमा की तबियत स्थिर है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में जांच एजेंसियों के पास कोई ठोस सबूत नहीं हैं और केवल परेशान करने की नीयत से कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि बीजेपी षड्यंत्र रच रही है और जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। बघेल ने आरोप लगाया कि ईओडब्ल्यू अदालत के निर्देशों की अनदेखी कर रही है और कानून से ऊपर समझ रही है।
भूपेश बघेल ने बीजेपी के आरोपों का पलटवार करते हुए कहा कि अगर उन्हें अपने बेटे के लिए कुछ करना होता, तो वे उसे जेल में जाने ही नहीं देते। उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में तीन और लोगों को प्रोडक्शन वारंट पर बुलाया गया, जो सिर्फ उत्पीड़न के उद्देश्य से किया गया है।
पूर्व सीएम ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद ईडी ने अपनी फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर दी है, लेकिन ईओडब्ल्यू अब तक रिपोर्ट नहीं पेश कर रही। लखमा ने कहा कि अगर ईडी ने समय पर जवाब दिया होता, तो 17 दिसंबर को ही फैसला आ गया होता। उनका आरोप है कि कुछ लोग साजिश कर रहे हैं ताकि लखमा जेल में ज्यादा समय तक रहें। उन्होंने कहा कि अदालत को फैसला करना है, लेकिन जवाब न देने की वजह से सुनवाई दूसरी तारीख पर टल रही है। बघेल ने कहा कि आरोपियों को ‘मगरमच्छ के आंसू’ बहाना बंद करना चाहिए और ईडी को सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए जाने चाहिए।