भारत इस वर्ष 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है, और इस अवसर पर कर्तव्य पथ पर होने वाली परेड में शामिल होने के लिए सरकार ने एक अनूठा कदम उठाया है। देश भर के लगभग 10,000 नागरिकों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है, जो अपने असाधारण योगदान के लिए सम्मानित किए जाएंगे।
सरकार ने इन आमंत्रित अतिथियों के चयन में उन समाजिक और पेशेवर वर्गों को प्राथमिकता दी है, जिन्होंने मेहनत, नवाचार और समर्पण से देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस पहल का उद्देश्य न केवल गणतंत्र दिवस के ऐतिहासिक महत्व को उजागर करना है, बल्कि यह भी दर्शाना है कि सरकार हर वर्ग की उपलब्धियों को पहचानने के लिए प्रतिबद्ध है।
इन विशेष अतिथियों की मौजूदगी से कर्तव्य पथ पर आयोजित भव्य समारोह की गरिमा और भी बढ़ जाएगी और यह लाखों आम नागरिकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा, जो देश की प्रगति में अपना योगदान दे रहे हैं।
गणतंत्र दिवस 26 जनवरी, 1950 को संविधान लागू होने के दिन के रूप में मनाया जाता है, जब भारत एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य बना। इस दिन दिल्ली में आयोजित परेड में देश की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और उपलब्धियों का प्रदर्शन किया जाता है।
10,000 नागरिकों को आमंत्रित करने का यह निर्णय एक समावेशी और सम्मानपूर्ण भारत की दिशा में एक नया कदम है। यह उन लोगों को मंच देता है जिन्होंने चुपचाप लेकिन प्रभावशाली रूप से देश की सेवा की है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह पहल आने वाले वर्षों के गणतंत्र दिवस समारोहों के लिए नए मानक स्थापित करेगी।