नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम संशोधन विधेयक के पारित न हो पाने को लेकर विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि आजादी के 78 साल बाद भी देश की महिलाओं को उनका संवैधानिक अधिकार पूरी तरह नहीं मिल पाया है, जो बेहद निराशाजनक है।

प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि जो लोग “लड़की हूं, लड़ सकती हूं” जैसे नारे देकर महिलाओं के अधिकारों की बात करते थे, वही अब इस मुद्दे से पीछे हटते नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की जीत का दावा करने वालों से यह पूछा जाना चाहिए कि जब बेटियों के हक की बात अटकती है तो उसे जीत कैसे कहा जा सकता है।

रेखा गुप्ता ने कहा कि करीब तीन दशक के लंबे इंतजार के बाद उम्मीद थी कि महिला आरक्षण का रास्ता साफ होगा, लेकिन विपक्ष के रुख के चलते विधेयक पर सहमति नहीं बन सकी। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘कोटे में कोटा’ और परिसीमन जैसे मुद्दों को बहाना बनाकर इस प्रस्ताव को रोकने की कोशिश की गई।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि 2023 के प्रस्ताव और वर्तमान विधेयक की संरचना लगभग समान थी, बावजूद इसके इस बार विरोध क्यों किया गया, यह समझ से परे है। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व देने के लिए एक संतुलित फार्मूला पेश किया था, जिससे न तो महिलाओं का हक प्रभावित होता और न ही पुरुष प्रतिनिधित्व कम होता।

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों ने हमेशा महिलाओं को केवल वोट बैंक की तरह देखा है। उन्होंने तर्क दिया कि तीन तलाक कानून और शाह बानो केस जैसे मुद्दों पर भी विपक्ष का रुख महिलाओं के हितों के खिलाफ रहा है।

रेखा गुप्ता ने आगे कहा कि कुछ राजनीतिक दलों को डर है कि सामान्य परिवार की महिलाएं राजनीतिक परिवारों के वर्चस्व को चुनौती दे सकती हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों में महिलाएं केंद्र में हैं, यही वजह है कि देश की महिलाएं और बेटियां लगातार आगे बढ़ रही हैं और उनका विश्वास सरकार पर मजबूत हुआ है।

उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में महिलाएं अपने संघर्ष और क्षमता के दम पर अपना स्थान खुद बनाएंगी और इस प्रयास में उन्हें प्रधानमंत्री मोदी का पूरा समर्थन प्राप्त है।