दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लाखों परिवारों के लिए सरकार ने बड़ी राहत की घोषणा की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को ‘स्वगम’ पोर्टल लॉन्च करते हुए बताया कि अब कॉलोनियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया बिना लेआउट प्लान के भी आगे बढ़ सकेगी। सरकार का कहना है कि इस फैसले से वर्षों से अटकी हुई प्रक्रिया को गति मिलेगी और लोगों को अपने घरों के निर्माण व विकास से जुड़े कामों में आसानी होगी।
सरकार ने हाल ही में नीति में बदलाव करते हुए 1511 अनधिकृत कॉलोनियों को ‘जहां है, जैसा है’ के आधार पर नियमित करने का निर्णय लिया है। पहले कॉलोनियों का लेआउट प्लान न होने के कारण नियमितीकरण की प्रक्रिया में बड़ी बाधा आती थी, लेकिन अब इस शर्त को हटा दिया गया है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री-उदय योजना 29 अक्टूबर 2019 से लागू है, जिसके तहत अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को मालिकाना हक देने की प्रक्रिया चल रही है। इस योजना के तहत जीपीए, एग्रीमेंट टू सेल या कब्जे से जुड़े दस्तावेज रखने वाले लोगों को संपत्ति का अधिकार दिया जा रहा है। दिल्ली की कुल 1731 कॉलोनियों में से अधिकांश इस योजना के दायरे में आती हैं।
हालांकि कुछ क्षेत्रों को इस योजना से बाहर रखा गया है। इनमें वन क्षेत्र, संरक्षित भूमि, पुरातात्विक स्थल, यमुना का बाढ़ क्षेत्र, मास्टर प्लान की सड़कों का राइट ऑफ वे, हाई टेंशन लाइन वाले इलाके, दिल्ली रिज क्षेत्र और 69 पहले से विकसित कॉलोनियां शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकारी जमीन पर बनी संपत्तियों के लिए कंवेयंस डीड, जबकि निजी जमीन पर बनी संपत्तियों के लिए ऑथराइजेशन स्लिप जारी की जा रही है। 31 मार्च 2026 तक करीब 40 हजार दस्तावेज जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि लेआउट प्लान की कमी के कारण भवन नक्शे पास नहीं हो पा रहे थे, जिससे पूरी प्रक्रिया धीमी थी। अब यह बाधा खत्म कर दी गई है।
नई व्यवस्था के तहत 1511 कॉलोनियों में सभी प्लॉट और भवनों को आवासीय श्रेणी में माना जाएगा। इसके अलावा 20 वर्ग मीटर तक की दुकानों को 6 मीटर चौड़ी सड़क होने पर नियमित किया जा सकेगा, जबकि 10 वर्ग मीटर तक की दुकानों को संकरी गलियों में भी राहत दी जाएगी।
सरकार ने आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है। लोगों को ‘स्वगम’ पोर्टल पर जाकर अपनी कॉलोनी का चयन करना होगा, जहां वार्ड और जोन की जानकारी स्वतः भर जाएगी। इसके बाद पीएम-उदय केस आईडी के आधार पर आवेदन आगे बढ़ेगा। जिनके पास यह आईडी नहीं है, उन्हें पहले संबंधित पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा।
यह पूरी प्रक्रिया राजस्व विभाग और डीडीए के सहयोग से पूरी की जाएगी। दस्तावेज जारी होने के बाद संबंधित जानकारी एमसीडी को भी उपलब्ध कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह फैसला केवल मालिकाना हक देने तक सीमित नहीं है, बल्कि अनधिकृत कॉलोनियों को पूरी तरह नियमित कर उन्हें शहर के विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे लाखों परिवारों को स्थिरता, सुरक्षा और बेहतर जीवन की उम्मीद मिलेगी।