नई दिल्ली। केंद्र सरकार देश की हवाई सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ पर काम कर रही है। इसी कड़ी में भारतीय सशस्त्र बल भी दुश्मन के ड्रोन हमलों से निपटने के लिए संयुक्त काउंटर-मानवरहित विमान (CUAS) ग्रिड विकसित कर रहे हैं। इस नई प्रणाली के कार्यान्वयन से भारत की हवाई रक्षा पहले से कहीं अधिक प्रभावी हो जाएगी।
तीनों सेनाओं—सेना, वायुसेना और नौसेना—के काउंटर-ड्रोन सिस्टम को जोड़कर बनाया जा रहा यह संयुक्त ग्रिड, मौजूदा हवाई सुरक्षा नेटवर्क से अलग होगा। इसमें भारतीय वायुसेना की इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल जैसी प्रणालियाँ शामिल नहीं होंगी। इसके बजाय यह नेटवर्क जॉइंट एयर डिफेंस सेंटर के माध्यम से तीनों सेनाओं के बीच तालमेल और समन्वय सुनिश्चित करेगा।
ड्रोन खतरों पर निगरानी और नियंत्रण
इस सीयूएएस ग्रिड का मुख्य उद्देश्य दुश्मन या संदिग्ध ड्रोन गतिविधियों पर लगातार नजर रखना और किसी भी संभावित खतरे को समय रहते निष्क्रिय करना होगा। अधिकारियों के अनुसार, मौजूदा एयर डिफेंस नेटवर्क को छोटे ड्रोन की निगरानी का जिम्मा देने से अतिरिक्त दबाव पड़ता। नई व्यवस्था में पिछले 5-10 वर्षों में तीनों सेनाओं द्वारा खरीदे गए विभिन्न काउंटर-ड्रोन एयर डिफेंस सिस्टम को एकीकृत किया जाएगा। इससे ड्रोन खतरों से निपटने की क्षमता और भी मजबूत होगी।
ऑपरेशन सिंदूर का अनुभव
पाकिस्तानी सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की और चीनी ड्रोन का इस्तेमाल कर भारतीय नागरिक और सैन्य ठिकानों पर हमला करने की कोशिश की थी। हालांकि, भारतीय सेना के एयर डिफेंस ने इन हमलों को सफल नहीं होने दिया। छोटे ड्रोन को भारतीय सेना की एल-70 और जेडयू-23 एयर डिफेंस गन से काफी नुकसान पहुंचाया गया।
आबादी वाले क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ाई जाएगी
भारतीय सेना अब आबादी वाले इलाकों में एयर डिफेंस गन तैनात करने की योजना बना रही है ताकि नागरिकों और संवेदनशील ठिकानों को किसी भी ड्रोन या हवाई हमले से सुरक्षित रखा जा सके। इसके अलावा, सरकार मिशन सुदर्शन चक्र के तहत हवाई हमलों से बचाव के लिए शील्ड विकसित करने पर भी काम कर रही है। इसके लिए पहले ही एक समिति का गठन किया जा चुका है।
तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने और उन्हें एकीकृत करने की जिम्मेदारी चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पास है, जिससे भारत की हवाई सुरक्षा पहले से ज्यादा सक्षम और प्रभावी बन सके।