बुधवार को संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश की विकास यात्रा, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संसद को संबोधित करना उनके लिए गर्व और संतोष का विषय है। राष्ट्रपति ने बताया कि बीता वर्ष भारत की तेज़ प्रगति और गौरवशाली परंपराओं के उत्सव के रूप में याद किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि देशभर में ‘वंदे मातरम’ की रचना के 150 वर्ष पूरे होने का उत्साह देखने को मिल रहा है। इस अवसर पर राष्ट्र कवि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी रचना ने देशवासियों को एकजुट करने का कार्य किया है। राष्ट्रपति ने इस विषय पर संसद में हुई विशेष चर्चा की सराहना करते हुए सभी सांसदों को बधाई दी।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने बताया कि देश ने हाल ही में श्री गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी वर्ष पूरे सम्मान के साथ मनाया। साथ ही, बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर पूरे राष्ट्र ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और आदिवासी समाज के प्रति उनके योगदान को स्मरण किया। सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती से जुड़े कार्यक्रमों ने ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को और सशक्त किया। वहीं, भारत रत्न भूपेन हजारिका की जयंती समारोहों ने देश को संगीत और सांस्कृतिक एकता के सूत्र में बांधा। राष्ट्रपति ने कहा कि जब राष्ट्र अपने महान पूर्वजों के योगदान को याद करता है, तब युवा पीढ़ी को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है और विकसित भारत की दिशा में यात्रा तेज होती है।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर बोलते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी के जीवन से हमें निडरता और आत्मसम्मान का संदेश मिलता है। उन्होंने कहा कि भारत ने यह सिद्ध किया है कि शक्ति का प्रयोग विवेक और जिम्मेदारी के साथ किया जा सकता है। ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से भारतीय सशस्त्र बलों ने अपनी क्षमता और साहस का परिचय दिया है। देश ने अपने संसाधनों के बल पर आतंकवाद के ठिकानों को ध्वस्त किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने यह संदेश दिया है कि भारत पर होने वाले किसी भी हमले का उत्तर ठोस और निर्णायक होगा। सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का निर्णय भी आतंकवाद के विरुद्ध रणनीति का हिस्सा है। इसके साथ ही देश की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए मिशन सुदर्शन चक्र पर कार्य प्रगति पर है।
शताब्दी के दूसरे चरण में प्रवेश
राष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2026 के साथ भारत इस शताब्दी के दूसरे चरण में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने बताया कि शताब्दी के पहले 25 वर्षों में देश ने अनेक ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। बीते एक दशक से अधिक समय में भारत ने हर क्षेत्र में अपनी आधारशिला को सुदृढ़ किया है और यह काल विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में एक मजबूत पड़ाव सिद्ध हो रहा है।
ग्रामीण विकास का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने बताया कि गांवों में रोजगार और समग्र विकास को बढ़ावा देने के लिए ‘विकसित भारत–ग्राम विकास कानून’ लागू किया गया है। इस कानून के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाएगी। इस घोषणा पर एनडीए और भाजपा सांसदों ने मेज थपथपाकर समर्थन जताया, जबकि विपक्षी सांसदों ने खड़े होकर विरोध करते हुए कानून को वापस लेने की मांग की।
एनडीए से महिला कैडेटों का पहला बैच पास
महिला सशक्तिकरण पर बोलते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि सरकार की नीतियों के कारण महिलाओं ने हर क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने बताया कि कुछ महीने पहले राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) से महिला कैडेटों का पहला बैच सफलतापूर्वक उत्तीर्ण हुआ, जो देश के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इससे यह विश्वास और मजबूत हुआ है कि भारत के विकास और सुरक्षा में नारी शक्ति की भूमिका निर्णायक है।