दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर 2025 को हुए कार धमाके में 35 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। इस हमले में ‘सफेदपोश’ आतंकी मॉड्यूल का हाथ बताया गया, जिसमें कार के अंदर बम रखा गया था। इस मामले में फरार आरोपी और बाल रोग विशेषज्ञ मुजफ्फर अहमद राथर के खिलाफ अब कड़ा कार्रवाई का रास्ता तैयार किया जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, राथर ने अफगानिस्तान से रसद, वित्त और योजना संबंधी मदद मुहैया कराकर इस आतंकी साजिश में प्रमुख भूमिका निभाई थी। एनआईए की विशेष अदालत ने पहले ही उसे भगोड़ा घोषित कर दिया है, और अब उसके खिलाफ इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया चल रही है।
जांच में पता चला है कि राथर ने डॉ. उमर उन नबी और अफगान सहयोगियों के साथ मिलकर आत्मघाती हमले की योजना बनाई। राथर ने आतंकी मॉड्यूल के लिए धन जुटाने में भी योगदान दिया और बम निर्माण तथा संचालन की रणनीति के लिए अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का सहारा लिया।
अधिकारियों ने बताया कि राथर अगस्त 2025 में दिल्ली विस्फोट से पहले भारत से भाग गया था। उसने पहले दुबई का रुख किया और उसके बाद अफगानिस्तान में प्रवेश कर लिया, जहां वह अब छिपा हुआ है। पूछताछ में अन्य गिरफ्तार आरोपियों ने यह भी बताया कि राथर ने साजिश के लिए लगभग 6 लाख रुपये जुटाए थे।
इसके अलावा, 2021 में राथर ने डॉ. मुजम्मिल अहमद गनाई और उमर के साथ तुर्की यात्रा की थी, जिसका उद्देश्य अफगानिस्तान स्थित आतंकी नेटवर्क से संपर्क स्थापित करना और तैयारी करना था। इस यात्रा के बाद उन्होंने फरीदाबाद के अल-फलाह विश्वविद्यालय के पास 360 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट, पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर जैसी रासायनिक सामग्री जमा की।
श्रीनगर पुलिस की जांच में इस आतंकी साजिश का भंडाफोड़ हुआ। गनाई को गिरफ्तार किया गया और विस्फोटक जब्त किए गए, जिससे संभवतः अन्य योजनाकार घबराकर लाल किले के बाहर धमाका कर बैठे। वहीं, अक्टूबर 2024 में नौगाम, बूनपोरा में जैश-ए-मोहम्मद के पोस्टर मिलने के बाद यह अंतरराज्यीय आतंकी नेटवर्क भी उजागर हुआ।
अधिकारियों का कहना है कि मुजफ्फर राथर की गिरफ्तारी और उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करना इस मामले में न्याय की दिशा में अहम कदम होगा।