दिल्ली उच्च न्यायालय में शराब नीति मामले से जुड़ी सीबीआई की अपील पर बुधवार को सुनवाई आगे बढ़ा दी गई। अदालत ने अब इस मामले को 4 मई के लिए सूचीबद्ध किया है। सीबीआई ने निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत 21 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया था।

सुनवाई के दौरान आप (AAP) से जुड़े कुछ नेताओं ने न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ के समक्ष पेश होने से इनकार करते हुए बहिष्कार का रुख अपनाया। इस पर अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित पक्षों को जवाब दाखिल करने के लिए अंतिम अवसर प्रदान किया।

गौरतलब है कि 20 अप्रैल को न्यायमूर्ति शर्मा ने स्वयं को मामले से अलग करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने न्यायाधीश को पत्र लिखकर सुनवाई में शामिल न होने की बात कही थी और इसे लेकर महात्मा गांधी के सत्याग्रह का हवाला दिया गया था। इसी तरह पूर्व विधायक दुर्गेश पाठक ने भी पत्र के माध्यम से अपनी बात रखी।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसे निचली अदालत का पूरा रिकॉर्ड अब तक प्राप्त नहीं हुआ है, जिसके चलते सुनवाई को आगे बढ़ाना आवश्यक है। इसके साथ ही कुछ आरोपियों की ओर से अब तक जवाब दाखिल नहीं किए जाने पर अदालत ने शनिवार तक अंतिम मौका दिया है।

इसी बीच सीबीआई की उस याचिका पर भी नोटिस जारी किया गया है, जिसमें 9 अप्रैल के अंतरिम आदेश को रद्द करने की मांग की गई है।

निचली अदालत ने 27 फरवरी को इस मामले में केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य को यह कहते हुए बरी कर दिया था कि मामला कानूनी परीक्षण में टिक नहीं पाता। हालांकि बाद में उच्च न्यायालय ने जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई पर रोक लगाई थी और कुछ टिप्पणियों को प्रथम दृष्टया त्रुटिपूर्ण बताया था।