नई दिल्ली। कश्मीरी गेट स्थित यमुना बाजार घाट के आसपास लंबे समय से रह रहे पंडों को हटाने की प्रक्रिया जल्द शुरू हो सकती है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) द्वारा दी गई 15 दिन की अतिरिक्त मोहलत 30 मई को समाप्त हो चुकी है, जिसके बाद स्थिति अनिश्चित बनी हुई है।
सूत्रों के अनुसार, प्रभावित परिवारों ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सहित अन्य जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर घाट क्षेत्र के 300 मीटर दायरे में पुनर्वास की मांग की थी। हालांकि अब तक इस पर कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है।
इसी बीच पंडा एसोसिएशन ने इस मामले को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया। शुक्रवार को हुई सुनवाई में अदालत ने तत्काल किसी प्रकार की राहत देने से इनकार कर दिया।
300 से अधिक मकानों को खाली करने का आदेश
जिला प्रशासन ने डीडीए एक्ट के तहत नोटिस जारी करते हुए 300 से अधिक घरों को खाली करने के निर्देश दिए हैं। नोटिस में यमुना किनारे के इस क्षेत्र को ‘ओ जोन’ बताते हुए इसे अवैध बसावट करार दिया गया था। पहले चरण में 15 दिन का समय दिया गया था, जो 15 मई को समाप्त हुआ।
इसके बाद डीडीए ने मानवीय आधार पर अतिरिक्त 15 दिन की मोहलत दी थी, जो 30 मई को खत्म हो चुकी है।
पुनर्विकास की सरकार की योजना
सरकारी स्तर पर यमुना बाजार घाट क्षेत्र के पुनर्विकास की योजना पर काम चल रहा है। इससे पहले उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने क्षेत्र का निरीक्षण कर इसके सौंदर्यीकरण और विकास कार्यों पर जोर दिया था। योजना के तहत करीब 30 घाटों का कायाकल्प कर उन्हें हरियाली और आधुनिक सुविधाओं से विकसित करने की बात कही गई है।
वहीं, प्रभावित परिवारों का कहना है कि वे कई पीढ़ियों से इस क्षेत्र में रह रहे हैं, इसलिए उन्हें हटाया न जाए।
जिला प्रशासन के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि आगे की कार्रवाई डीडीए और संबंधित एजेंसियों के निर्देशों के अनुसार ही की जाएगी।