नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यस्थल का पता जल्द ही बदलने जा रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के नए परिसर का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है और फिलहाल अंतिम तैयारियों का काम चल रहा है। संभावना जताई जा रही है कि इसी महीने पीएमओ को नए भवन में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
विजय चौक के समीप रायसीना हिल के नीचे विकसित किए गए सेवा तीर्थ परिसर में प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस भवन बनाए गए हैं। यह परिसर तीन इमारतों—सेवा तीर्थ-1, सेवा तीर्थ-2 और सेवा तीर्थ-3—में विभाजित है।
सूत्रों के मुताबिक, 14 जनवरी के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साउथ ब्लॉक स्थित मौजूदा कार्यालय से सेवा तीर्थ परिसर में कामकाज शुरू कर सकते हैं। सेवा तीर्थ-1 में प्रधानमंत्री कार्यालय स्थापित किया गया है, जबकि सेवा तीर्थ-2 में कैबिनेट सचिवालय पहले ही स्थानांतरित हो चुका है। वहीं, सेवा तीर्थ-3 में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय कार्य करेगा, जहां राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का कार्यालय होगा।
सेंट्रल विस्टा परियोजना का अहम हिस्सा
सेवा तीर्थ परिसर सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत तैयार किया गया है। इस परियोजना के अंतर्गत नया संसद भवन और उपराष्ट्रपति एन्क्लेव पहले ही बनकर तैयार हो चुके हैं। इसके अलावा मंत्रालयों के लिए प्रस्तावित आठ नए कर्तव्य भवनों में से तीन बन चुके हैं और कई मंत्रालय वहां से काम भी शुरू कर चुके हैं। ऐसे में पीएमओ का स्थानांतरण इसी क्रम का अगला कदम माना जा रहा है।
नाम में हुआ बदलाव
शुरुआत में इस परिसर को ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव’ कहा जा रहा था, लेकिन दिसंबर में इसका नाम बदलकर ‘सेवा तीर्थ परिसर’ रखने का निर्णय लिया गया। इसी अवधि में देशभर में राजभवनों के नाम बदलकर ‘लोक भवन’ करने का फैसला भी लिया गया था। सेवा तीर्थ के समीप ही नए प्रधानमंत्री आवास का निर्माण भी जारी है, जिसके पूरा होने के बाद प्रधानमंत्री का निवास सात लोक कल्याण मार्ग से यहां स्थानांतरित किया जाएगा।
आधुनिक सुविधाओं से लैस नया पीएमओ
सेवा तीर्थ परिसर में गणमान्य अतिथियों के स्वागत और बैठकों के लिए अत्याधुनिक कक्ष तैयार किए गए हैं, जिनमें भारतीय संस्कृति और परंपरा की झलक देखने को मिलेगी। कैबिनेट बैठकों के लिए विशेष सभागार बनाए गए हैं। इसके अलावा, नए पीएमओ में अधिकारियों के लिए ओपन-फ्लोर व्यवस्था रखी गई है, जैसा कि कर्तव्य भवनों में अपनाया गया है।
गौरतलब है कि स्वतंत्रता के बाद से प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक में संचालित होता रहा है। इसी परिसर में लंबे समय तक विदेश और रक्षा मंत्रालय भी कार्यरत रहे। वहीं, नॉर्थ ब्लॉक में गृह और वित्त मंत्रालय स्थित थे, जिन्हें अब कर्तव्य भवनों में स्थानांतरित कर दिया गया है। भविष्य में ब्रिटिश काल के नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को ‘युगे-युगीन भारत संग्रहालय’ के रूप में विकसित करने की योजना है।